मेरठ : उत्तर प्रदेश मेरठ की किठौर विधानसभा से समाजवादी पार्टी के विधायक और पूर्व मंत्री शाहिद मंजूर इन दिनों अपने एक बयान को लेकर चर्चा में हैं. एक चुनावी सभा के दौरान उन्होंने कथित तौर पर दूध और जमीन के कारोबार से जुड़े माफियाओं को खुली चुनौती देते हुए कहा कि जितने दूध के माफिया हैं, जितने जमीन के माफिया हैं, सब आओ इकट्ठे होकर जोर लगाओ. तुम्हारी मां ने दूध पिलाया है तो मुझे हराओ. उनका यह बयान तेजी से वायरल हो रहा है और इसके राजनीतिक मायने भी निकाले जा रहे हैं.
शाहिद मंजूर किठौर की राजनीति में लंबे समय से सक्रिय चेहरा हैं. वह पहली बार 2002 में किठौर से विधायक बने और 2002, 2007 तथा 2012 में लगातार तीन विधानसभा चुनाव जीते. 2022 में उन्होंने एक बार फिर समाजवादी पार्टी के टिकट पर किठौर सीट पर जीत दर्ज की. यानी किठौर की राजनीति में उनका प्रभाव दो दशक से ज्यादा पुराना है.
शाहिद मंजूर अखिलेश यादव सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं. उनके परिवार की राजनीतिक पकड़ भी पुरानी है. उनके पिता मंजूर अहमद भी कई बार विधायक रहे हैं. यही वजह है कि किठौर में मंजूर परिवार को लंबे समय से प्रभावशाली राजनीतिक परिवार माना जाता है.
हालांकि 2027 विधानसभा चुनाव से पहले किठौर में राजनीतिक समीकरण बदलते नजर आ रहे हैं. स्थानीय रिपोर्टों में उनके सामने बीजेपी- आरएलडी के संभावित दावेदारों के साथ-साथ परिवार और संगठन के भीतर की खींचतान को भी चुनौती बताया गया है.
ऐसे माहौल में शाहिद मंजूर का माफियाओं को ललकारने वाला बयान सिर्फ भाषण नहीं, बल्कि चुनावी शक्ति प्रदर्शन के तौर पर भी देखा जा रहा है. संदेश साफ है कि विरोधी जितना जोर लगाना चाहते हैं, लगा लें, मंजूर मुकाबले के लिए तैयार हैं.