बेंगलुरु: नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी (NLSIU) में भी विवाद खड़ा हो गया है. छात्रों और पूर्व छात्रों ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा और भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत के दीक्षांत समारोह में शामिल होने का कड़ा विरोध जताया है. यह विरोध NALSAR यूनिवर्सिटी (हैदराबाद) में हुए बवाल के बाद सामने आया है.
शनिवार को जारी एक बयान पर NLSIU के 2026 बैच के 165 ग्रेजुएट, 409 वर्तमान छात्र और 128 पूर्व छात्रों समेत 700 से ज्यादा लोगों ने हस्ताक्षर किए. उन्होंने NALSAR के छात्रों और फैकल्टी के खिलाफ BCI की कार्रवाई पर नाराजगी जताते हुए ‘अप्रतिबंधित एकजुटता’ व्यक्त की.
छात्रों ने कहा कि दीक्षांत समारोह किसी छात्र के शैक्षणिक जीवन का महत्वपूर्ण पल होता है. ऐसे उच्च पदों पर बैठे व्यक्तियों को आमंत्रित करना, जिन्होंने छात्रों के प्रति तिरस्कार भरा रवैया दिखाया है, अपमानजनक है और छात्रों के संघर्षों का मजाक उड़ाना है. उन्होंने NALSAR की उस मांग का समर्थन किया जिसमें CJI को मुख्य अतिथि बनाए जाने पर पुनर्विचार की अपील की गई थी. NLSIU छात्रों ने भी अपने समारोह में CJI की उपस्थिति पर गहरा असंतोष जताया.
BCI की भूमिका पर सवाल उठाते हुए छात्रों ने कहा कि NALSAR मामले में उठाए गए कदम ‘विच-हंट’ जैसे हैं. उन्होंने मांग की कि BCI बिना शर्त माफी मांगे क्योंकि इससे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का उल्लंघन हुआ. बयान में BCI अध्यक्ष द्वारा आधिकारिक लेटरहेड के इस्तेमाल के प्रोटोकॉल स्पष्ट करने को भी कहा गया.
छात्रों का आरोप है कि BCI की यह कार्रवाई एडवोकेट्स एक्ट-1961 के तहत उसकी शक्तियों से बाहर है और संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) का हनन है. उन्होंने BCI अध्यक्ष की राजनीतिक टिप्पणियों की भी आलोचना की और कहा कि इससे कानूनी पेशे में जनता का भरोसा कम हुआ है. “हमें एक बेहतर BCI चाहिए,” छात्रों ने जोर दिया.
BCI ने बाद में NALSAR के खिलाफ कार्यवाही बंद कर दी थी, लेकिन छात्रों का कहना है कि ऐसी कार्रवाई शुरू करना ही चिंता का विषय है. यह बयान भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए जारी किया गया है.