नई दिल्ली: समाजवादी पार्टी के प्रमुख नेता मोहम्मद आजम खां ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण फैसला लिया है. उन्होंने अपने सबसे महत्वपूर्ण और व्यक्तिगत प्रोजेक्ट मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट से खुद को, अपनी पत्नी डॉ. तंजीन फातिमा और छोटे बेटे अब्दुल्ला आजम को पूरी तरह अलग कर दिया है. तीनों ने ट्रस्ट के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया है.
यह ट्रस्ट रामपुर में मौलाना मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी की स्थापना और संचालन के लिए जिम्मेदार है, साथ ही यह रामपुर पब्लिक स्कूलों को भी चलाता है. आजम खां इसे अपना सपनों का प्रोजेक्ट मानते थे. ट्रस्ट में अब नई व्यवस्था लागू हो गई है. आजम खां की बहन निकहत अफलाक अध्यक्ष, आजम खां के बड़े बेटे मोहम्मद अदीब आजम सचिव का पद संभालेंगे.
क्यों उठाया ऐसा कदम
अन्य प्रमुख पदों पर आजम खां के निकट सहयोगी जैसे सपा विधायक नसीर अहमद खान (संयुक्त सचिव), मुश्ताक अहमद सिद्दीकी (उपाध्यक्ष) और जावेद उर रहमान खान (कोषाध्यक्ष) बने हुए हैं. मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार डॉ. एस.एन. सलाम ने इस बदलाव की पुष्टि की है. उन्होंने बताया कि आजम खां, उनकी पत्नी और अब्दुल्ला आजम के जेल में होने या कानूनी मामलों में फंसे रहने से ट्रस्ट के दैनिक कामकाज में काफी दिक्कतें आ रही थीं. इसलिए ट्रस्ट की सुचारु रूप से कार्यप्रणाली बनाए रखने के लिए यह कदम उठाया गया.
30 से अधिक मामले दर्ज
पृष्ठभूमि में देखें तो 2017 में सपा सरकार के जाने और भाजपा की सत्ता में आने के बाद आजम खां पर कई कानूनी कार्रवाईयां तेज हुईं. उन पर 90 से ज्यादा मुकदमे दर्ज हुए, जिनमें से करीब 30 से अधिक मामले इसी जौहर ट्रस्ट और यूनिवर्सिटी से जुड़े हैं. मुख्य आरोपों में ट्रस्ट के लिए खरीदी गई जमीनों पर अवैध कब्जे और अन्य अनियमितताओं का नाम लिया जाता रहा है. यह फैसला ट्रस्ट को कानूनी दबाव से बचाने और उसके संचालन को जारी रखने की एक रणनीति के रूप में देखा जा रहा है, जहां परिवार के प्रभावित सदस्यों को हटाकर अन्य विश्वसनीय लोगों को जिम्मेदारी सौंपी गई है.