Azamgarh new house Brahmin vs Kathavachak issue: 21 जून को इटावा में जो घटना हुई, उस पर अखिलेश यादव ने कहा ब्राह्मण जो हैं, वो पीडीए से दान लेना बंद कर दें, उसके ठीक 12 दिन बाद अखिलेश यादव को क्या ब्राह्मण की जरूरत पड़ गई, या पीडीए से ही उन्होंने पूजा करवाई, ये सवाल सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल है. अखिलेश ने आजमगढ़ में उन्होंने नया मकान बनवाया और गृह प्रवेश के लिए पंडित बुलाया, जिसकी तस्वीरें जब सामने आई तो सोशल मीडिया पर एक नई बहस छिड़ गई, कई लोगों ने ये दावा किया कि अखिलेश को पूजा करवा रहे व्यक्ति ब्राह्मण जाति से नहीं हैं. उनकी जाति कुशवाहा बताई गई, न्यूज 18 की रिपोर्ट में तो ये तक दावा किया गया कि
“अखिलेश यादव ने काशी के विद्वान ब्राह्मणों को न्यौता भेजा था, लेकिन वो अखिलेश की टिप्पणी से नाराज थे, इसलिए नहीं आए. ऐसी चर्चा भी है.”
पर इस पर आएं उससे पहले अखिलेश यादव के नए घर की तस्वीरें देख लीजिए, अनवरगंज में करीब 72 बिस्वा जमीन में बने इस चार मंजिला इमारत के
मुलायम सिंह यादव का नाम लेकर अखिलेश कहते हैं नेताजी कहते थे कि इटावा हमारा दिल तो आज़मगढ़ धड़कन है. इसलिए आजमगढ़ हमारा दूसरा घर है. लेकिन जैसे ही अखिलेश ने नया घर बनवाया, उसी दिन पहले उनकी सुरक्षा में चूक की ख़बर सामने आती है, और उसके बाद उनका गृह प्रवेश करवाने वाले पुजारी की जाति पर सवाल उठने लगते हैं. ऐसे में अखिलेश के बगल में खड़े जो व्यक्ति दिख रहे हैं, जो अखिलेश को पूजा करवा रहे हैं, उनसे भी कई मीडिया चैनल ने बातचीत की और ये समझना चाहा कि आखिर आपकी जाति को लेकर हंगामा क्यों बरपा है, तो उन्होंने एक इंटरव्यू में जो बताया वो और चौंकाने वाला था. वो कहते हैं
“करीब 12 बजे अखिलेश यादव वहां पहुंचे. दोनों द्वार का पूजन करवाया, नारियल फोड़वाया, फीता काटा गया. उसके बाद 5 ईंट का पूजन करवाया. लेकिन मुझे कहा जा रहा है कि आपने गलत किया. लोग फोन करके भी ऐसा कह रहे हैं. हम वाद-विवाद नहीं बढ़ाना चाहते. बस इतना बताना चाहता हूं कि मेरे चारों ओर यादवों के गांव. मेरे घर के तीन तरफ यादव. मैं बाहर जाता हूं तो उनसे ही घर देखने को कहता हूं. मैं आगे भी अखिलेशजी की पूजा कराऊंगा. पूजा में भेदभाव नहीं कर सकता। मेरा साथ कुल पांच ब्राहमण पूजा कराने गए थे. छठे पुजारी अतरौलिया के दुबे जी थे. मेरा नाम चंदन पांडेय है, चंदन कुशवाहा नहीं. जो लोग ये कह रहे गलत कह रहे हैं.”
ये जाति जैसे ही स्पष्ट हुई फिर से अखिलेश यादव ट्रोल होने लगे और उन्हें कहा जाने लगा कि आखिर ब्राह्मण से पूजा आपने क्यों करवाई, मतलब सवाल उठाने वाले लगातार सवाल कर रहे हैं. नेताओं की अपनी-अपनी सियासत है, यादव कथावाचक बनाम ब्राह्मण का जो मामला इटावा के दादरपुर गांव में जो हुआ, उसमें अब पुलिस की जांच जारी है, कौन दोषी है, कौन पीड़ित है, इस पर सबकी राय अलग-अलग है, इसलिए सियासत से हटकर सोचिए कि समाज की एकजुटता कैसे बनी रह सकती है. अखिलेश ने पहले यादव कथावाचक परिवार का पक्ष लिया औऱ अब ब्राह्मण से गृह प्रवेश करवाया, जिसकी तस्वीरे देख कई लोग सवाल खड़े करने लगे. और पूछने लगे कि क्या अखिलेश यादव ने शंकराचार्य की वो बात मान ली कि पूजा-पाठ का हक सिर्फ ब्राह्मण को ही है, और वहां सिर्फ जाति की सियासत की खातिर कथावाचकों का साथ दे रहे थे, ये बात कुछ और है.