| अमेरिका, ब्रिटेन, सऊदी भारत के साथ, फिर जयशंकर ने किसे कहा साथ देना है तो दो, उपदेश मत दो 10 दिन में पाक ने फालतू खर्च किए 50 करोड़, कर्जे के पैसे कर दिए दान, किस्सा सुन हो जाएंगे हैरान.! |
22 अप्रैल की घटना के बाद पाकिस्तान के तीन रूप नजर आ रहे हैं, पहला डरा-सहमा हुआ, दुनिया के सामने खुद को पीड़ित बताने की कोशिश करता हुआ, इसे लेकर ही मुद्दा संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद तक पहुंच गया है, जहां पाकिस्तान की भयंकर क्लास लगनी तय है, जबकि दूसरा सीमा पर सीजफायर का उल्लंघन करता हुआ, अपनी सेना को कहता हुआ कि युद्ध के लिए तैयार रहो, और सिर्फ तैयारी-तैयारी में उसने 10 दिन में करीब 50 करोड़ रुपये खर्च कर डाले, क्योंकि सेनाओं की तैनाती से लेकर जंग लगे फाइटर जेट तक को मुस्तैद दिखाने में वो दिन-रात लगा है. जबकि तीसरा दुनियाभर के मुस्लिम देशों से हर हाल में मदद की गुहार लगाता हुआ, और ये कामयाब भी होता दिखने लगा, जब तुर्की ने पाकिस्तान में अपने वॉरशिप भेज दिए, लेकिन इसके पीछे का किस्सा बड़ा हैरान करने वाला है.
कहा जाता है कि साल 2022 में जब पाकिस्तान के सिंध प्रांत में बाढ़ आई थी, तो तुर्की ने इसे राहत सामाग्री भेजी थी. साल 2023 में जब तुर्की में ऐसे हालात पैदा हुए तो वही राहत सामाग्री इसने तुर्की को भेज दी, जिससे खूब किरकिरी हुई.
ख़बर यहां तक है कि इस बार इसने कर्ज के पैसे भी दान कर दिए हैं, जिसे लेकर वहां की जनता सवाल उठा रही है कि खुद के खाने का ठीक नहीं, और पूरी दुनिया का रहनुमा बनने चले हैं. जबकि भारत की हालत इससे ठीक उलट है, भारत से दोस्ती करने के लिए दुनियाभर के देश बेकरार हैं, यहां तक कि मोदी जब सऊदी अरब से लौटे तो कई देशों के राष्ट्राध्यक्षों ने फोन पर बात की, और कहा हम आपके साथ हैं, लेकिन 4 मई को जैसे ही विदेश मंत्री एस जयशंकर का ये बयान सामने आया कि हमें उपदेशक नहीं साथ देने वाला चाहिए तो कई लोग नहीं समझ पाए कि आखिर ये क्या माजरा है, जानकार बताते हैं जयशंकर ने यूरोपियन मुल्क को एक बार फिर कह दिया है दोहरी नीति नहीं चलेगी, खुलकर साथ देना है तो दीजिए, ज्ञान मत दीजिए, क्योंकि भारत इस बार अलग मूड में है, रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने एक कार्यक्रम में साफ कह दिया है जनता जैसा चाहती है, वैसा ही जवाब पाकिस्तान को मिलेगा.
जबकि एक न्यूज एजेंसी को दिए इंटरव्यू में बाबा रामदेव ने साफ-साफ कहा, ''पाकिस्तान खुद खंड-खंड होने वाला है, कराची और लाहौर में भी गुरुकुल खोलना पड़ सकता है.'' जबकि ओवैसी जैसे नेता इस बार पाकिस्तान को लेकर बेहद सख्त लहजे में हैं, पहले सरकार का हर कदम साथ देने का वादा किया, और अब कह रहे हैं किसी भी सूरत में पाकिस्तान को माफी नहीं मिलनी चाहिए, बल्कि उसे सजा देनी ही होगी
बयान यह बताता है हिंदुस्तान के लोग किस कदर गुस्से में हैं, और क्या चाहते हैं, ये बात प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी भली-भांति जानते हैं इसीलिए लगातार बैठकों का दौर चल रहा है, पहले CCS की तमाम बैठकें, उसके बाद अब बीते दिनों पहले नेवी चीफ से मिलना उसके बाद वायुसेना प्रमुख से मुलाकात कर जानकारी लेना, सेना को खुली छूट देना, ये इशारा करता है कुछ बड़ा होने वाला है, पर सवाल है आखिर कब, जनता का गुस्सा दिनों-दिन बढ़ता जा रहा है.