अयोध्या के राम मंदिर से जुड़े कथित चंदा गबन मामले ने प्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक हलकों में हलचल बढ़ा दी है। पुलिस द्वारा एक कर्मचारी की गिरफ्तारी और उसके घर से नकदी बरामद होने के बाद अब पूरे मामले की जांच के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने विशेष जांच दल (SIT) का गठन कर दिया है।
पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार कर्मचारी लवकुश मिश्रा के घर से करीब 10 लाख रुपये नकद बरामद किए गए हैं। जांच के दौरान कुछ रकम घर की अलमारियों में मिली, जबकि कुछ नकदी कथित तौर पर अन्य स्थानों पर छिपाकर रखी गई थी। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि यह पैसा कहां से आया और क्या इसका संबंध मंदिर के दान प्रबंधन से है।
लवकुश मिश्रा के परिवार का कहना है कि वह पहले कार मैकेनिक का काम करता था और कुछ समय पहले ही मंदिर से जुड़ी नौकरी में आया था। दूसरी ओर जांच एजेंसियां उसकी आय, संपत्तियों और हाल के वित्तीय लेन-देन की जांच कर रही हैं। कुछ मीडिया रिपोर्टों में यह भी दावा किया गया है कि उसके नाम पर या उससे जुड़े लोगों के माध्यम से जमीन खरीदने की जानकारी सामने आई है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तीन सदस्यीय एसआईटी गठित की है। इस टीम को पहले चरण में सात दिनों के भीतर प्रारंभिक रिपोर्ट और उसके बाद विस्तृत जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करनी है।
एसआईटी की अध्यक्षता लखनऊ मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत कर रहे हैं। टीम में वरिष्ठ आईएएस अधिकारी किरन एस भी शामिल हैं, जिन्होंने पूर्व में केंद्रीय जांच एजेंसियों के साथ काम किया है। तीसरे सदस्य के रूप में वित्त विभाग के विशेष सचिव नीलरतन को जिम्मेदारी दी गई है, जो वित्तीय रिकॉर्ड, ऑडिट और दान प्रबंधन से जुड़े पहलुओं की समीक्षा करेंगे।
मामले की पृष्ठभूमि में मंदिर ट्रस्ट द्वारा कराए गए ऑडिट को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। शुरुआती जांच में दानपात्र और उससे जुड़े रिकॉर्ड में कुछ अनियमितताओं की आशंका जताई गई थी। इसके बाद सीसीटीवी फुटेज और अन्य रिकॉर्ड की समीक्षा शुरू हुई, जिसमें एक कर्मचारी की भूमिका संदिग्ध बताई गई।
इसी बीच राजनीतिक स्तर पर भी इस मुद्दे को लेकर बयानबाजी तेज हुई। विपक्ष ने दान प्रबंधन में गड़बड़ी के आरोप लगाए, जबकि सरकार और मंदिर प्रशासन का कहना है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जा रही है और दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।
राम मंदिर करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। ऐसे में जांच एजेंसियों पर यह जिम्मेदारी है कि वे तथ्यों के आधार पर पूरे मामले की सच्चाई सामने लाएं। अब सभी की निगाहें एसआईटी की रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिससे स्पष्ट होगा कि कथित अनियमितताओं में कितनी सच्चाई है और आगे क्या कार्रवाई की जाएगी।