4 जुलाई 2024 को UP पुलिस के कई अधिकारी मैनपुरी आश्रम में जाते हैं. वहां न जाने ऐसा क्या देख लेते हैं कि वो सभी घबरा कर बाहर आते हैं. मीडिया कई सवाल पूछती है लेकिन कोई अधिकारी कोई जवाब नहीं देता है. एसपी सिटी राहुल मिठास तो निकल जाते हैं, पर DSP सुनील कुमार जवाब देते हैं तो न जाने क्या-क्या बोलते हैं...तो क्या आश्रम में कुछ ऐसा जिसकी भनक UP पुलिस को लग गई थी. आश्रम की दीवारों में ऐसा क्या है कि ED की जांच में कुछ बड़ा खुलासा हो सकता है...
मीडिया में किए जा रहे कई दावे
मीडिया में एक से बढ़कर एक दावे किए जा रहे हैं, जिसका ना कोई सिर है, ना ही कोई पैर है. बाबा की संपत्ति की कीमत करीब 1 हज़ार करोड़ से ज्यादा हो सकती है. जानकारी यहां तक है कि जब कभी भी सूरजपाल कथा कहने जाता उसके पहले उसके कमांडो वहां पहुंच जाते. बाबा का कहीं भी काफिला निकलता तो सड़क पर सूरजपाल के पाले हुए गुर्गे खड़े रहते. कई जानकारों का दावा है कि उसका करोड़ों का खर्च है. लेकिन सवाल है कि जब खाते में पैसे कम हैं तो फिर कहां गायब है वो पैसा जिसकी भनक ED को लग चुकी है.
मैनपुरी से चंदे की लिस्ट आई सामने
मैनपुरी की ये लिस्ट बाहर आ गई हैं. ये बाबा के आश्रम से निकली तस्वीर है. इसमें साफ-साफ लिखा है किसी ने एक लाख तो किसी ने 80 हज़ार का चंदा दिया. ये संख्या सिर्फ 200 नहीं है, बल्कि 2 हज़ार या 20 हज़ार भी हो सकती है. दरअसल रजिस्टर के कुछ पेज की फोटो ही मीडिया में आ पाई, जिसके कारण अंदाजा लगा पाना मुश्किल हो रहा है. क्या बाबा ने ट्रस्ट इसलिए बनाया था क्योंकि वो टैक्स से बच पाए? अगर टैक्स का खेल चल रहा था फिर ED, सीबीआई और इनकम टैक्स अपने तरीके से काम कर सकती है. ट्रस्ट और NGO का एक बहुत बड़ा सिंडीकेट होता है. क्या बाबा भी उस ग्रुप का हिस्सा रहा है.
बुहत शातिर बाबा सूरजपाल
ऐसा कहा जा रहा है कि बीजेपी सरकार के सामने संकट है कि बिना आरोप बाबा पर कैसे बुलडोज़र चलाए, क्योंकि ये बाबा बहुत शातिर है. इसकी प्लानिंग बहुत पहले से चल रही थी. ऐसा लग रहा था जैसे इनको पता हो भविष्य में कोई गलती हो तो कैसे बचना है. बाबा की टीम एकदम ट्रेंड बैंक लूटने वाली टीम लगती है. क्या आम इंसान के साथ-साथ राजनीतिक पार्टी, बिज़नेसमैन और बाकी लोगों ने बाबा को चंदा दिया? क्या ये कुछ ऐसा है जैसे चुनाव के पहले राजनीतिक पार्टियों के चंदे का सवाल खड़ा हुआ था?
अखिलेश सहित कई नेताओं से है रिश्ते
लंबे समय से लोकप्रियता है, खुद पूर्व सीएम अखिलेश यादव से सीधे रिश्ते होना, कई सवालों की ओर इशारा करता है. योगी आदित्यनाथ के हाथों में फिलहाल पूरा कंट्रोल है. ये केस जल्दी ख़त्म होने वाला नहीं लगता है. ऐसा लगता है बीजेपी सरकार के पास कुछ तो ऐसा है जो छिपा रही है. यानी ठीक ऐसी ही ख़ामोशी विकास दूबे वाले केस में दिखी थी. अचानक विकास दूबे की लोकेशन मिली और गाड़ी पलट गई. इसलिए हो सकता है कि अब ED या इनकम टैक्स की टीम की एंट्री हो और बाबा जड़ से ख़त्म हो जाए.