भेड़िये के आतंक का केंद्र बना यूपी का बहराइच, दहशत में लोग

Global Bharat 03 Sep 2024 04:53: PM 1 Mins
भेड़िये के आतंक का केंद्र बना यूपी का बहराइच, दहशत में लोग

उत्तर प्रदेश के तराई क्षेत्र में मानव-वन्यजीव संघर्ष एक गंभीर समस्या बनती जा रही है. गोरखपुर, लखीमपुर, बहराइच, बलरामपुर और सीतापुर जैसे इलाकों में तेंदुआ और बाघ जैसे खतरनाक जानवरों का आतंक पहले से ही मौजूद था, लेकिन अब भेड़िए भी इस लिस्ट में शामिल हो गए हैं. खासकर बहराइच के महसी इलाके में भेड़ियों का आतंक पिछले कुछ महीनों से बढ़ता जा रहा है, जिसमें अब तक 10 मासूम बच्चों की जान जा चुकी है.

महसी क्षेत्र में भेड़ियों को पकड़ने के लिए वन विभाग पूरी तरह से सक्रिय हो गया है. अब तक चार भेड़ियों को पकड़ा जा चुका है, जिसमें से तीन भेड़ियों को वन विभाग ने और एक को वाइल्डलाइफ एक्सपर्ट्स की मदद से पकड़ा गया है. वन विभाग के प्रधान मुख्य वन संरक्षक और विभागाध्यक्ष सुधीर कुमार शर्मा ने बताया कि भेड़ियों को पकड़ने के लिए लखनऊ क्षेत्र के दोनों संरक्षकों को तैनात किया गया है. इसके अलावा, बाहर से दो डीएफओ अपनी टीम के साथ यहां भेजे गए हैं. कुल मिलाकर 10 अधिकारी इस अभियान में जुटे हुए हैं.

सुधीर कुमार शर्मा ने यह भी बताया कि भेड़ियों को पकड़ने के लिए ड्रोन का इस्तेमाल किया जा रहा है. यह एक ग्रामीण इलाका है और भेड़िए छोटे जानवर होते हैं, जिनके लिए गन्ने की फसल में छिपना आसान हो जाता है. इस चुनौतीपूर्ण स्थिति में थर्मल ड्रोन का उपयोग करके वन विभाग को भेड़ियों की पहचान करने में काफी मदद मिल रही है. उन्होंने कहा कि बरसात के मौसम में वन्यजीव अक्सर नदियों के साथ बहकर आबादी वाले क्षेत्रों में आ जाते हैं. ऐसा लगता है कि इस बार भी यही हुआ है, जिसके कारण ये जंगली जानवर रिहायसी इलाके में घुस आए हैं. भेड़ियों के साथी पकड़े जाने के बाद ये और भी खतरनाक हो गए हैं, जिससे इनका व्यवहार बहुत हिंसक हो गया है.

लखीमपुर, खीरी, बहराइच और अन्य तराई क्षेत्रों में वन विभाग के अधिकारी लगातार निगरानी कर रहे हैं. बरेली, मुरादाबाद और बिजनौर डिवीजन के अधिकारी भी स्थिति पर नजर रख रहे हैं. खासकर बिजनौर में गुलदार की आबादी अधिक है, जहां पिछले साल 40 गुलदार पकड़े गए थे और इस साल अब तक 24 गुलदार पकड़े जा चुके हैं. वन विभाग की यह कोशिश है कि जल्द से जल्द इस समस्या का समाधान निकाला जाए ताकि लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके और मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम किया जा सके.

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