बलिया: सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर के समाजवादी पार्टी में बड़ी टूट और 20-25 सांसदों के साथ जुड़ने के संकेत वाले बयान पर बलिया से सपा सांसद सनातन पांडे ने करारा पलटवार किया है. सनातन पांडे ने राजभर को सख्त चेतावनी देते हुए कहा, "ओम प्रकाश राजभर जी अपने दायरे में रहें और दायरे में रहकर ही बात करें."
बलिया के बागी स्वभाव का किया जिक्र
सांसद सनातन पांडे ने बलिया की ऐतिहासिक बागी परंपरा को याद दिलाते हुए कहा कि बलिया की पहचान हमेशा संघर्ष और बागी तेवर से रही है. 1857 की क्रांति में बलिया के वीर सपूत मंगल पांडे ने सबसे पहले अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह की ज्वाला सुलगाई थी. उन्होंने बताया कि देश की आजादी से पहले तीन जनपदों, सतारा (महाराष्ट्र), बलिया (उत्तर प्रदेश) और मेदिनीपुर (बंगाल) ने स्वतंत्र होने का गौरव हासिल किया था, जिसमें बलिया की भूमिका अग्रणी रही.
यही वजह है कि बलिया को आज भी 'बागी बलिया' कहा जाता है. सनातन पांडे ने पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर का उदाहरण देते हुए कहा कि बलिया की धरती ने ऐसे नेताओं को जन्म दिया है जिन्होंने राष्ट्रीय राजनीति की दिशा बदली. उन्होंने साफ चेतावनी दी कि अगर लोकतंत्र, संविधान और देशहित की रक्षा के लिए संघर्ष करना पड़ा तो वह पीछे नहीं हटेंगे और नए मंगल पांडे की भूमिका निभाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं.
भाजपा पर भी साधा निशाना
सांसद ने ओम प्रकाश राजभर और उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के बयानों पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि भाजपा विपक्ष की आवाज दबाने के लिए एजेंसियों का दुरुपयोग कर रही है. उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा की नीतियां गरीबों, मजदूरों, शोषितों और वंचितों के खिलाफ हैं.
सपा में टूट की अटकलों को सिरे से खारिज करते हुए सनातन पांडे ने कहा कि गरीबों-वंचितों की आवाज उठाने वाला कोई भी सांसद भाजपा के दबाव में नहीं आएगा. उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि अगर किसी को भाजपा का विरोध करना है तो इस्तीफा देकर जनता के बीच आना चाहिए.
कौन हैं सनातन पांडेय
सनातन पांडेय उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक जाना-पहचाना चेहरा हैं. बलिया जिले से ताल्लुक रखने वाले ये नेता समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ सदस्य हैं और लंबे समय से सक्रिय राजनीति में रहे हैं. उन्होंने अब तक पांच बार विधानसभा और दो बार लोकसभा चुनाव लड़े हैं. एक बार वे विधायक भी चुने जा चुके हैं.
उनका जन्म और राजनीतिक आधार बलिया के रसड़ा विधानसभा क्षेत्र के पांडेयपुर इलाके से है. शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने पॉलिटेक्निक की डिग्री हासिल की और गन्ना विकास परिषद में जूनियर इंजीनियर (JE) के पद पर नौकरी शुरू कर दी. लेकिन साल 1996 में उन्होंने सरकारी नौकरी को अलविदा कह दिया और पूरी तरह समाजवादी पार्टी में आ गए.
तब अब तक वे लगातार सपा के साथ मजबूती से जुड़े हुए हैं और पार्टी के लिए मैदान में सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं. बलिया की राजनीति में उनका अपना एक अलग पहचान और जनाधार माना जाता है.