भोजपुर : बिहार के भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव में 17 जून को हुई पुलिस मुठभेड़ और उसमें घायल हुए भरत भूषण तिवारी की मौत के मामले ने बड़ा राजनीतिक और सामाजिक विवाद खड़ा कर दिया है. लगातार उठ रहे सवालों और निष्पक्ष जांच की मांग के बीच बिहार सरकार ने अब पूरे मामले की न्यायिक जांच कराने का फैसला लिया है. मुख्यमंत्री ने घोषणा की है कि उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश से इस मुठभेड़ की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराई जाएगी, ताकि घटना के सभी पहलुओं की पारदर्शी तरीके से पड़ताल हो सके.
17 जून को पुलिस ने दावा किया था कि भरत तिवारी ने पुलिस टीम पर पिस्टल तान दी थी और गिरफ्तारी के दौरान मुठभेड़ हुई, जिसमें उसके पैर और जांघ में गोली लगी थी. बाद में इलाज के दौरान पटना पीएमसीएच में उसकी मौत हो गई.
हालांकि, परिजनों और ग्रामीणों ने पुलिस की कहानी पर गंभीर सवाल उठाए हैं. उनका आरोप है कि भरत तिवारी ने आत्मसमर्पण कर दिया था, इसके बावजूद उसे गोली मारी गई. शव गांव पहुंचने के बाद ग्रामीणों ने आरा-बक्सर फोरलेन जाम कर विरोध प्रदर्शन किया और दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की मांग की.
मामला राजनीतिक रंग भी ले चुका है. विपक्ष के साथ-साथ सत्ता पक्ष के कुछ नेताओं ने भी घटना की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई थी. बढ़ते विवाद और जनदबाव के बीच सरकार ने न्यायिक जांच का फैसला लिया है. जांच रिपोर्ट से यह साफ होने की उम्मीद है कि मुठभेड़ पुलिस की वैध कार्रवाई थी या फिर परिजनों द्वारा लगाए जा रहे आरोपों में सच्चाई है.