Bharat Tiwari Encounter Case : बिहार के भोजपुर में हुए चर्चित भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने आने के बाद नया विवाद खड़ा हो गया है. रिपोर्ट के मुताबिक भरत तिवारी के शरीर में कुल पांच गोलियां लगी थीं और सभी गोलियां कमर के नीचे, जांघों और पैरों के हिस्से में लगी थीं. इस खुलासे के बाद एनकाउंटर की परिस्थितियों पर फिर से सवाल उठने लगे हैं. वहीं, परिजनों का दावा है कि भरत तिवारी की मौत सिर्फ गोलियां लगने से नहीं, बल्कि समय पर इलाज नहीं मिलने की वजह से हुई.
भरत तिवारी के परिवार का आरोप है कि उन्होंने पुलिस के सामने सरेंडर कर दिया था, इसके बावजूद उन्हें गोली मारी गई। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो का हवाला देते हुए परिवार का कहना है कि वीडियो में भी यही दिखाई देता है कि भरत तिवारी पुलिस की गिरफ्त में थे. हालांकि, इस वीडियो की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है.
दूसरी ओर बिहार पुलिस का दावा है कि भरत तिवारी ने पुलिस टीम पर फायरिंग की थी. पुलिस के अनुसार आत्मरक्षा में जवाबी फायरिंग की गई, जिसमें वह घायल हुए और बाद में अस्पताल में इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई. पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार, एक गोली बाईं टांग में लगी थी. दूसरी गोली दाईं जांघ के बाहरी हिस्से से अंदरूनी हिस्से को चीरते हुए निकल गई. तीसरी गोली दाईं जांघ के बीच के अंदरूनी हिस्से में लगी थी. चौथी गोली बाईं जांघ के बीच के अंदरूनी हिस्से में धंसी मिली, जबकि पांचवीं गोली बाईं जांघ के ऊपरी हिस्से में लगी थी. रिपोर्ट में दर्ज सभी गोलियां कमर के नीचे लगीं.
इसी रिपोर्ट के आधार पर अब इलाज को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं. परिजनों का कहना है कि यदि घायल भरत तिवारी को तुरंत अस्पताल पहुंचाया जाता और समय पर इलाज मिलता, तो उनकी जान बचाई जा सकती थी. हालांकि, यह दावा अभी जांच के दायरे में है और इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है.
पूरे मामले की न्यायिक जांच सेवानिवृत्त न्यायाधीश विनोद कुमार सिन्हा कर रहे हैं. वह भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव पहुंचकर भरत तिवारी के परिवार से मिले, उनके साथ जिला प्रशासन और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे. जांच टीम घटना से जुड़े सभी तथ्यों की पड़ताल कर रही है.
यह मामला अब राजनीतिक रंग भी ले चुका है. कई विपक्षी नेताओं ने भरत तिवारी के परिवार से मुलाकात की है और पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं. वहीं बिहार सरकार का कहना है कि न्यायिक जांच निष्पक्ष तरीके से कराई जा रही है और रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी.
फिलहाल इस मामले में दो अलग-अलग दावे सामने हैं. एक ओर परिवार का आरोप है कि भरत तिवारी को पकड़ने के बाद गोली मारी गई, जबकि पुलिस इसे आत्मरक्षा में हुई जवाबी फायरिंग बता रही है. पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने आने के बाद अब सभी की नजर न्यायिक जांच की अंतिम रिपोर्ट पर टिकी है, जिससे यह साफ हो सकेगा कि एनकाउंटर किन परिस्थितियों में हुआ और इलाज में किसी तरह की लापरवाही हुई या नहीं.