पहलगाम की घटना पर बड़ा खुलासा, 3 और जगहों को बनाना था निशाना, हिरासत में 180 संदिग्ध

Abhishek Chaturvedi 01 May 2025 01:03: PM 3 Mins
पहलगाम की घटना पर बड़ा खुलासा, 3 और जगहों को बनाना था निशाना, हिरासत में 180 संदिग्ध
• एम्यूजमेंट पार्क की रेकी, 2 और टूरिस्ट प्लेस पर भी निशाना, पर बैसरन घाटी को इसलिए चुना, हुआ बड़ा खुलासा!
• जिन 2500 को सेना ने उठाया उनमें से 180 निकले संदिग्ध, मोबाइल से खुले ऐसे राज, खुद NIA डीजी पहुंचे पहलगाम!
• क्या है अल्ट्रास्टेट कम्यूनिकेशन सिस्टम, जिससे दुश्मनों ने दिया सुरक्षाबलों को चकमा, अब भी घाटी में दर्जनों दुश्मन!

नई दिल्ली: पहलगाम की घटना को 9 दिन बीत चुके हैं, लेकिन 9वें दिन 4 बड़े खुलासे सामने आए हैं, जिसमें खुलासा नंबर 1 है- 3 और टूरिस्ट प्लेस पर निशाने का था प्लान. मीडिया रिपोर्ट बताती है उस दिन पहलगाम की बैसरन घाटी के अलावा जम्मू-कश्मीर के 3 और टूरिस्ट प्लेस दुश्मनों के निशाने पर थे, जिनकी रेकी भी इन्होंने कर ली थी. सूत्र बताते हैं कई जगहों की तस्वीरें भी इनके आकाओं तक पहुंच चुकी थी, जिनमें से एक था पहलगाम का एम्युजमेंट पार्क, जहां पर्यटकों की संख्या खूब होती है. लेकिन वहां घटना को अंजाम देने के बाद दुश्मनों के लिए भागना आसान नहीं था.

शायद यही वजह है कि इन्होंने बैसरन घाटी को चुना, जहां सुरक्षाबलों को पहुंचने में करीब 20-30 मिनट का वक्त लगता और ये लोग ने 10-15 मिनट में घटना को अंजाम देकर फरार हो गए. इसके अलावा दो और टूरिस्ट प्लेस की जानकारी सुरक्षाबलों को हाथ लगी है, जहां की सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है. इसके अलावा खुलासा नंबर 2- 7 दिन पहले दुश्मनों ने पहलगाम में ली थी शरण. टीवी 9 अपनी रिपोर्ट में ये दावा करता है कि घटना से 7 दिन पहले ही दुश्मन पहलगाम पहुंच चुके थे, और दो दिन पहले ही उन्होंने बैसरन घाटी में अपना अड्डा बनाया था, जहां 4 OGW यानि ओवर ग्राउंड वर्कर ने उनकी मदद की थी, जिनमें से कईयों को सेना ने उठाया है.

खुलासा नंबर 3- 2500 लोगों में 180 संदिग्ध हिरासत में, सुरक्षाबलों ने स्थानीय पुलिस की मदद से जिन 2500 लोगों को उठाया था, उनमें से 180 लोग संदिग्ध निकले हैं, जिनके ऊपर शक है कि ये दुश्मनों को खाना-पानी मुहैया कराते थे, उनकी ग्राउंड पर मदद किया करते थे, हाथों में हथियार भले ही नहीं उठाते थे, पर इनकी सोच दुश्मनों की मदद की थी.

खुलासा नंबर 4 है- अल्ट्रास्टेट कम्युनिकेशन सिस्टम, जिसका इस्तेमाल दुश्मन घटना के दौरान कर रहे थे, जिसे आसान भाषा में आप सैटेलाइट फोन कह सकते हैं. इसमें कम्युनिकेशन के लिए न कोई मोबाइल चाहिए, ना कोई सिम कार्ड, मोबाइल टावर हो न हो, इसका कोई फर्क नहीं पड़ता, बल्कि ये सीधा हाईकमान से कनेक्ट होता है, इसका इस्तेमाल अक्सर सेना करती है और यहां दुश्मनों ने इसका इस्तेमाल किया, जो साफ बताता है इसमें पाकिस्तानी सेना का हाथ है. हालांकि पाकिस्तान अभी भी इस दावे को नकार रहा है.

शायद यही वजह है कि अब पहलगाम घटना की जांच कर रही NIA यानि राष्ट्रीय जांच एजेंसी के डीजी सदानंद दात्ते खुद पहलगाम पहुंचे हैं, और एक-एक सबूत खुद देख रहे हैं, और इसके बाद पाकिस्तान के पहलगाम से जुड़े एक-एक तार कैसे डिकोड होंगे, इसका अंदाजा आप खुद लगा लीजिए, क्योंकि किसी घटना में एनआईए के अधिकारियों का पहुंचना ही दुश्मनों की नींद उड़ाने वाली होती है, और यहां तो NIA के डीजी दौरे पर हैं.

फिलहाल भारत दो तरीके के काम कर रहा है, पहला पहलगाम में हुई घटना की गंभीरता से जांच करना, इसमें पाकिस्तान के हाथ होने के एक-एक सबूत जुटाकर दुनिया को दिखाना, और दूसरा पाकिस्तान के परमानेंट इलाज का प्लान बनाना, जिसे लेकर दिल्ली से जम्मू-कश्मीर तक बैठकें जारी हैं, और पाकिस्तान को ये भी डर सताने लगा है कि आने वाले कुछ घंटे पाकिस्तान पर भारी पड़ने वाले हैं, वो अमेरिका से अब गुहार लगाने लगा है कि भारत को कहिए आराम से पेश आए, पर अब पाकिस्तान की कोई चाल नहीं चलने वाली. ये खुलासा इतना बड़ा है कि इसने ये भी सवाल खड़े कर दिए हैं कि क्या घाटी में अब भी दुश्मन छिपे हैं.

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