नई दिल्ली: पटना में सोमवार को एक सरकारी समारोह में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने नव नियुक्त आयुष चिकित्सकों को नियुक्ति पत्र वितरित किए. इस कार्यक्रम में कुल 1283 डॉक्टरों (आयुर्वेद, होम्योपैथी और यूनानी) को नियुक्तियां दी गईं. समारोह मुख्यमंत्री आवास पर आयोजित था, जिसमें उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, विजय कुमार सिन्हा, स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे सहित कई मंत्री मौजूद थे.
इसी दौरान एक महिला डॉक्टर नुसरत परवीन (या नुसरत प्रवीण) नियुक्ति पत्र लेने मंच पर पहुंचीं. वे चेहरे पर नकाब (फेस कवरिंग) पहने हुई थीं. वीडियो फुटेज में दिख रहा है कि सीएम नीतीश कुमार ने पहले उन्हें नियुक्ति पत्र सौंपा, फिर उनके नकाब की ओर इशारा करते हुए कुछ कहा और खुद ही उसे नीचे खींच दिया, जिससे उनका मुंह और ठोड़ी दिखने लगी. इस दौरान उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने उन्हें रोकने की कोशिश की, लेकिन तब तक नकाब हट चुका था. कुछ लोग हंसते भी नजर आए, जबकि महिला डॉक्टर असहज दिखीं.
यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया और राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया. विपक्षी दलों ने इसे महिलाओं की गरिमा और धार्मिक स्वतंत्रता पर हमला बताया. कांग्रेस ने इसे "घटिया हरकत" करार देते हुए सीएम से इस्तीफे की मांग की. पार्टी ने सोशल मीडिया पर पोस्ट किया कि राज्य के सबसे बड़े पद पर बैठा व्यक्ति अगर सार्वजनिक मंच पर ऐसा व्यवहार करे तो महिलाओं की सुरक्षा पर सवाल उठते हैं.
आरजेडी ने भी तीखा हमला बोला. पार्टी ने वीडियो शेयर करते हुए पूछा कि नीतीश जी को क्या हो गया है, उनकी मानसिक स्थिति दयनीय हो गई है या वे पूरी तरह संघी बन चुके हैं? आरजेडी प्रवक्ता ने कहा कि यह मुस्लिम समुदाय के प्रति एनडीए सरकार की सोच को दर्शाता है और महिलाओं का अपमान है.
मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से इस घटना पर अभी कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है. यह घटना नीतीश कुमार के सार्वजनिक व्यवहार को लेकर पहले से चल रही चर्चाओं को और हवा दे रही है. स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के उद्देश्य से आयोजित इस कार्यक्रम का फोकस अब इस विवाद पर शिफ्ट हो गया है. यह मामला व्यक्तिगत स्वतंत्रता, धार्मिक प्रथाओं और सार्वजनिक मर्यादा के सम्मान की बहस छेड़ रहा है.