पटना: बिहार में विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के करारी हार के बाद पार्टी के अंदर खुला असंतोष सामने आ गया है. शुक्रवार को बिहार प्रदेश महिला कांग्रेस की अध्यक्ष डॉ. सरवत जहां फातमा ने अपने पद से तत्काल प्रभाव से इस्तीफा दे दिया. उन्होंने अपना त्यागपत्र सीधे कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को भेजा है.
इस्तीफे के पत्र में डॉ. फातमा ने साफ कहा कि चुनाव में महिलाओं को महज 4 प्रतिशत टिकट देना पार्टी के महिला सशक्तिकरण के दावों की पोल खोलता है. उन्होंने इसे संगठन की विश्वसनीयता और लाखों महिला कार्यकर्ताओं के विश्वास पर चोट बताया.
फातमा ने लिखा, “महिला कांग्रेस अध्यक्ष के नाते मैंने पिछले 28 महीनों में बूथ स्तर तक संगठन खड़ा करने, प्रशिक्षण शिविर लगाने, सदस्यता अभियान चलाने और महिलाओं को सक्रिय राजनीति में लाने की पूरी कोशिश की, लेकिन टिकट बंटवारे ने सारी मेहनत पर पानी फेर दिया. नैतिकता के आधार पर अब मैं इस पद पर बने रहना उचित नहीं समझती.”
उन्होंने परंपरा का भी जिक्र किया कि बिहार में पहले महिला कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष को विधानसभा का टिकट मिलता रहा है, लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ. राहुल गांधी के “नारी न्याय” और “आधी आबादी-पूरी हिस्सेदारी” के नारे के बावजूद धरातल पर महिलाओं की अनदेखी हुई, इस बात से वह बेहद आ-harmब हुईं.
डॉ. फातमा ने स्पष्ट किया कि उनका इस्तीफा गुस्से या नाराजगी में नहीं, बल्कि कांग्रेस की विचारधारा और महिला सशक्तिकरण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता के कारण है. उन्होंने कहा कि पद चले-चलते रहते हैं, संघर्ष नहीं रुकता. वह आगे भी पार्टी और महिलाओं के हक की लड़ाई जारी रखेंगी.
गौरतलब है कि 2020 में 19 सीटें जीतने वाली कांग्रेस इस बार सिर्फ 6 सीटों पर सिमट गई. कई दिग्गज नेता भी हार गए. हार के बाद टिकट वितरण, गठबंधन रणनीति और नेतृत्व को लेकर पार्टी में सवाल उठ रहे हैं. डॉ. फातमा का इस्तीफा इन सबके बीच एक बड़ा संकेत माना जा रहा है.