नई दिल्ली: ओडिशा विधानसभा में मंगलवार को उस समय अफरा-तफरी का माहौल देखने को मिला जब सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी और विपक्षी पार्टी कांग्रेस के नेताओं के बीच हाथापाई हो गई. विपक्षी कांग्रेस और बीजद के विरोध प्रदर्शन के दौरान विधायकों को एक-दूसरे को धक्का देते, रिपोर्टर की मेज पर खड़े होते और नारे लगाते देखा गया. सदन में प्रश्नकाल के दौरान उस समय तनाव बढ़ गया जब वरिष्ठ भाजपा विधायक जयनारायण मिश्रा कांग्रेस विधायक ताराप्रसाद बहिनीपति की ओर बढ़े, जो शहरी विकास मंत्री केसी महापात्रा के सामने खड़े थे और एक सवाल का जवाब दे रहे थे.
SCUFFLE IN ODISHA ASSEMBLY pic.twitter.com/Cmi3knjJrm
— arabinda mishra (@arabindamishra2) March 11, 2025
कांग्रेस नेता ने जयनारायण मिश्रा पर हाथापाई शुरू करने का आरोप लगाया और कहा कि उन्होंने उन्हें "धक्का" दिया क्योंकि वह मंत्री से "बोलना बंद करने का अनुरोध" कर रहे थे. बहिनीपति ने संवाददाताओं से कहा, "मिश्रा ने मेरी शर्ट का कॉलर पकड़ा और मुझे धक्का दिया. मैं मंत्री महापात्रा से अनुरोध कर रहा था कि सदन में व्यवस्था ठीक न होने पर वे जवाब देना बंद कर दें. मैंने उनसे हाथ जोड़कर अनुरोध किया. लेकिन मिश्रा अचानक मेरे पास आए और मेरा कॉलर पकड़ लिया."
इससे पहले बहिनीपति ने कार्यवाही बाधित करने के लिए स्पीकर के पोडियम पर चढ़ने का प्रयास किया था, लेकिन वे असफल रहे. हंगामे के बावजूद स्पीकर सुरमा पाढ़ी ने प्रश्नकाल जारी रखने की अनुमति दी. बहिनीपति को अनुशासनहीनता के लिए सात दिनों के लिए विधानसभा से निलंबित कर दिया गया है.
भाजपा विधायक टंकधर त्रिपाठी ने विपक्ष पर मंत्री के बोलने के दौरान "माइक तोड़ने" का प्रयास करने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा, "विपक्ष लोकतंत्र का हिस्सा है. सदन में सीमाएं तय होनी चाहिए. जब शहरी विकास मंत्री सदन में एक प्रश्न का उत्तर दे रहे थे, तब बीजेडी और कांग्रेस के विधायकों ने माइक तोड़ने और उनकी मेज से फाइलें छीनने का प्रयास किया. लोकतंत्र में यह स्वीकार्य नहीं है."
बीजद सदस्य अरुण कुमार साहू ने कहा, "हमने विपक्ष और सत्ता पक्ष के सदस्यों को सदन के वेल में भिड़ते कभी नहीं देखा. ओडिशा विधानसभा के इतिहास में ऐसा कभी नहीं हुआ." कांग्रेस विधायक सोफिया फिरदौस ने भाजपा नेताओं पर कांग्रेस के एक वरिष्ठ सदस्य को परेशान करने का आरोप लगाया और कहा, "पहली बार, महिला सदस्य आज विधानसभा में स्थिति से घबरा गईं. जब सदन में हंगामा हो रहा था, तो स्पीकर को कार्यवाही की अनुमति नहीं देनी चाहिए थी. हमारे वरिष्ठ नेता को भाजपा सदस्यों ने परेशान किया."
सदन की कार्यवाही दिन में चार बार स्थगित की गई. बीजद सदस्य, हालांकि वेल में मौजूद थे, लेकिन हाथापाई में शामिल होने से बचते रहे. इस बीच, विपक्षी बीजद और कांग्रेस के सदस्य अलग-अलग मुद्दों पर विरोध कर रहे थे. चूंकि मुख्यमंत्री लगातार दो दिनों तक सदन से अनुपस्थित रहे, इसलिए बीजद सदस्यों ने काले बैज पहने हुए, लालटेन का उपयोग करके विधानसभा परिसर में उनकी प्रतीकात्मक "खोज" की. उन्होंने सीएम के कक्ष के बाहर धरना भी दिया.