जयपुर: राजस्थान के नागौर जिले की मुंडवा नगरपालिका में भाजपा को बड़ी शर्मिंदगी का सामना करना पड़ा. नगरपालिका चुनाव में सबसे अधिक 10 वार्ड जीतकर सबसे बड़ा दल बनने के बावजूद पार्टी के चेयरमैन उम्मीदवार को एक भी वोट नहीं मिला. सभी भाजपा पार्षदों ने क्रॉस वोटिंग कर दी.
सोमवार को हुए चेयरमैन चुनाव में कांग्रेस और हनुमान बेनीवाल की राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (आरएलपी) की साझा उम्मीदवार अलका देवी कंडोई ने 13 वोट हासिल कर जीत दर्ज की. निर्दलीय उम्मीदवार घनश्याम सदावत को 12 वोट मिले और वे महज एक वोट से हार गए. भाजपा की उम्मीदवार गीता देवी को शून्य वोट मिले.
मुंडवा नगरपालिका में कुल 25 वार्ड हैं. चुनाव में भाजपा ने 10, आरएलपी ने 7, कांग्रेस ने 3 और निर्दलीय उम्मीदवारों ने 5 वार्ड जीते थे. कांग्रेस और आरएलपी ने गठबंधन कर अलका देवी को साझा उम्मीदवार बनाया. आरएलपी के 7 और कांग्रेस के 3 यानी कुल 10 वोट होने के बावजूद अलका को 13 वोट मिले, जिससे साफ है कि भाजपा या निर्दलीय पार्षदों में से कुछ ने उनके पक्ष में वोट किया.
घनश्याम सदावत पहले भाजपा से जुड़े रहे हैं और पार्टी की वरिष्ठ नेता डॉ. ज्योति मिर्धा के करीबी माने जाते हैं. टिकट न मिलने पर उन्होंने बगावत कर निर्दलीय चुनाव लड़ा था. उन्होंने भाजपा-आरएलपी-कांग्रेस गठबंधन को कड़ी टक्कर दी, लेकिन एक वोट से पीछे रह गए.
इस नतीजे से भाजपा के अंदर क्रॉस वोटिंग और अनुशासनहीनता के आरोप लगने लगे हैं. सबसे बड़ा दल होने के बावजूद चेयरमैन पद गंवाने और शून्य वोट पाने की घटना राजस्थान की स्थानीय निकाय राजनीति में चर्चा का विषय बन गई है.