कोलकाता: पश्चिम बंगाल के रेजीनगर विधानसभा उपचुनाव में नया मोड़ आ गया है. लेफ्ट फ्रंट की सहयोगी रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी (RSP) ने अपने उम्मीदवार का नाम वापस ले लिया है. पार्टी का आरोप है कि चुनाव आयोग ने उन्हें उनके पारंपरिक ‘कुदाल और फावड़ा’ वाले चुनाव चिह्न का इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं दी.
RSP के वरिष्ठ नेता मनोज बंदोपाध्याय ने बताया कि शनिवार को नामांकन की जांच के बाद पार्टी को सूचित किया गया कि वह पारंपरिक चिह्न का इस्तेमाल नहीं कर सकती. इसके बजाय उन्हें ‘बाल्टी’ वाले चिह्न पर चुनाव लड़ना होगा. उन्होंने कहा, “चुनाव आयोग ने एक छोटी सी तकनीकी खामी का हवाला देते हुए हमारा पारंपरिक चिह्न नहीं दिया. इसलिए हमने उम्मीदवार को वापस लेने का फैसला किया है. EVM पर नाम हो सकता है, लेकिन हम यह उपचुनाव नहीं लड़ रहे हैं.”
पार्टी के राज्य सचिव तपन होरे ने अधिकारियों पर चुनाव चिह्न आवंटन में साजिश और पक्षपात का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि पार्टी वकीलों से सलाह ले रही है और अदालत जाने पर विचार करेगी. RSP के लिए ‘कुदाल और फावड़ा’ सिर्फ चुनाव चिह्न नहीं, बल्कि उसके राजनीतिक संघर्ष और इतिहास से जुड़ा प्रतीक है.
इससे पहले रेजीनगर सीट को लेकर लेफ्ट फ्रंट के अंदर भी विवाद था. RSP इस सीट पर दावा कर रही थी, लेकिन CPI(M) ने अपना उम्मीदवार उतार दिया. इसके बाद RSP ने विकास चंद्र मिश्रा को बागी उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतारा था. अब RSP के पीछे हटने के बाद CPI(M) ही लेफ्ट फ्रंट की एकमात्र पार्टी है जो औपचारिक रूप से इस सीट पर चुनाव लड़ रही है. रेजीनगर विधानसभा उपचुनाव 6 अक्टूबर को होना है.