अभी हाल ही में केंद्र सरकार ने 'वन नेशन, वन इलेक्शन' को मंजूरी दी है जिसे भाजपा सांसद संजय जैसवाल ने अपना समर्थन दिया है. उन्होंने कहा कि बार-बार चुनाव होने से सरकार की गतिविधियों पर असर पड़ता है. जैस्वाल ने बताया कि लगातार चुनावों की वजह से देश में विकास की प्रक्रिया रुक जाती है.
उन्होंने ANI से बातचीत में कहा, "प्रधानमंत्री और पूरी कैबिनेट को मैं बधाई देता हूं कि, उन्होंने इस महत्वपूर्ण नतीजे पर पहुंचने का काम किया है. हर साल चुनाव होने से देश हमेशा तनाव में रहता है. जब चुनाव होते हैं, तो सरकार के कामकाज में रुकावट आती है, जो देश की प्रगति में बाधा डालती है. 'एक राष्ट्र, एक चुनाव' का मकसद है कि सभी चुनाव छह महीने के भीतर समाप्त हों."
भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता सीआर केसवन ने भी इस कदम की प्रशंसा की और इसे "राजनीतिक स्थिरता" लाने वाला बताया. उन्होंने कहा, "प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यह निर्णय हमारे संघवाद और राष्ट्र निर्माण की कोशिशों को मजबूत करेगा. यह हमारे संविधान की मूल भावना और उसकी अखंडता को भी बहाल करेगा, जैसा कि डॉ. भीमराव अंबेडकर और अन्य रचनाकारों ने हमें सिखाया."
केसवन ने बताया कि 1952 से 1967 तक देश में समानांतर चुनाव होते रहे, लेकिन इंदिरा गांधी की कांग्रेस द्वारा लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई राज्य सरकारों को लगभग 39 बार गिराया गया. इस वजह से एक समान चुनावों का चक्र टूट गया. उन्होंने कहा कि 32 से अधिक विपक्षी पार्टियां "एक राष्ट्र, एक चुनाव" के विचार का समर्थन कर रही हैं. यह एक अत्यधिक प्रगतिशील कदम है. केसवन ने कहा, "यह न केवल राजनीतिक स्थिरता लाएगा, बल्कि सार्वजनिक धन की बचत भी करेगा. इससे सार्वजनिक स्वास्थ्य में सुधार होगा और मतदाता भागीदारी बढ़ेगी."
गौरतलब है 'वन नेशन, वन इलेक्शन' के प्रस्ताव को कैबिनेट द्वारा मंजूरी मिल गई है. इसमें लोकसभा और विधानसभा चुनावों के साथ-साथ पंचायत और नगरपालिका चुनावों को भी एक साथ करने की बात की गई है. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को इस विषय पर एक उच्च स्तरीय समिति की रिपोर्ट प्राप्त हुई है, जो पूर्व राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद द्वारा स्थापित की गई थी. यह रिपोर्ट 18,626 पन्नों की है और इसे 191 दिनों की रिसर्च के बाद तैयार किया गया है.