गुवाहाटी/अगरतला: त्रिपुरा में भाजपा और उसके सहयोगी दल टिपरा मोथा (टीएमपी) के बीच गठबंधन संकट गहराता नजर आ रहा है. त्रिपुरा जनजातीय क्षेत्र स्वायत्त जिला परिषद (टीटीएएडीसी) के ग्राम परिषद चुनाव नजदीक आने के साथ ही टिपरा मोथा भाजपा पर लगातार दबाव बना रही है.
टिपरा मोथा पार्टी के प्रमुख प्रद्योत विक्रम माणिक्य देव वर्मा ने साफ संकेत दिया है कि अगर केंद्र और राज्य सरकार 2 मार्च 2024 को हुए त्रिपक्षीय समझौते की शर्तों को लागू नहीं करतीं, तो उनकी पार्टी आदिवासी क्षेत्रों में आगामी गांव समिति चुनावों में भाजपा के साथ गठबंधन से पीछे हट सकती है. उन्होंने कहा कि अगर त्रिपुरा के आदिवासियों को वादे के मुताबिक संवैधानिक अधिकार नहीं दिए गए, तो उन्हें अपना अलग रास्ता अपनाने के लिए मजबूर होना पड़ेगा.
देव वर्मा ने सोमवार को टीएमपी नेताओं की बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में यह टिप्पणी की. उन्होंने कहा, “अगर भाजपा के लोग गंभीर हैं, तो उन्हें समझौते को लागू करना चाहिए. मुझे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का बहुत सम्मान है, लेकिन समझौता लागू नहीं होने पर पार्टी को अपना अगला कदम तय करना पड़ेगा.”
गौरतलब है कि टीटीएएडीसी के तहत 587 गांव समितियों के चुनाव इस साल बाद में होने हैं. हाल ही में नई दिल्ली में भाजपा और टीएमपी नेताओं की बैठक में संयुक्त रणनीति पर कोई फैसला नहीं हो सका. इसमें भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और पूर्वोत्तर समन्वयक संबित पात्रा भी शामिल थे.
टिपरा मोथा मार्च 2024 से भाजपा नेतृत्व वाली सरकार में सहयोगी है. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में हुए समझौते के तहत टीएमपी के दो विधायक अनीमेश देव वर्मा और वृषकेतु देव बर्मा मुख्यमंत्री माणिक साहा के मंत्रिमंडल में शामिल किए गए थे. अप्रैल में हुए टीटीएएडीसी चुनावों में टीएमपी ने 28 निर्वाचित सीटों में से 24 पर जीत हासिल की थी, जबकि भाजपा केवल चार सीटों पर सिमट गई थी.
उधर भाजपा के आदिवासी नेताओं ने टिपरा मोथा पर दोहरी रणनीति अपनाने का आरोप लगाया है. उनका कहना है कि एक तरफ पार्टी राजनीतिक तरीकों से समझौते को लागू करने पर जोर दे रही है, दूसरी तरफ आदिवासी इलाकों में विरोध प्रदर्शन भड़का रही है. इनमें आत्मसमर्पण कर चुके पूर्व उग्रवादियों से जुड़े समूहों के समर्थन से किए जा रहे सड़क जाम भी शामिल हैं, जिससे यात्रियों को परेशानी हो रही है.