नई दिल्ली: दुनिया के सबसे बड़े वीडियो स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म यूट्यूब (YouTube) ने अपने व्यूज गणना (View Counting) तंत्र में एक बड़ा नीतिगत बदलाव करने का फैसला किया है। 24 अगस्त 2026 से लागू होने वाले इस नए नियम के तहत, अब किसी भी वीडियो के प्ले होते ही उसका व्यू दर्ज कर लिया जाएगा। यानी दर्शक के वीडियो पर क्लिक करते ही 'पहले फ्रेम' से ही पब्लिक व्यू काउंट बढ़ जाएगा, जिसके लिए अब तक तय न्यूनतम वॉच-टाइम की अनिवार्यता पूरी तरह समाप्त हो जाएगी।
यूट्यूब का यह नया मानक लॉन्ग-फॉर्म वीडियो, लाइव स्ट्रीम और शॉर्ट्स सहित सभी वीडियो फॉर्मेट्स पर वैश्विक स्तर पर समान रूप से लागू होगा। इससे पहले लॉन्ग वीडियोज के लिए लगभग 30 सेकंड तक देखे जाने पर ही एक आधिकारिक व्यू माना जाता था। कंपनी का कहना है कि अलग-अलग फॉर्मेट्स के लिए अलग गणना प्रणाली होने से क्रिएटर्स में मैट्रिक्स को लेकर असमंजस रहता था। इस एकरूपता के बाद यूट्यूब का सिस्टम भी इंस्टाग्राम और टिकटॉक जैसे अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के समकक्ष आ जाएगा, जिससे पब्लिक व्यूज की संख्या में तेजी से इजाफा देखने को मिल सकता है।
हालांकि, तकनीकी और व्यावसायिक दृष्टिकोण से इस बदलाव के गहरे मायने हैं। पब्लिक व्यूज में बढ़ोतरी के बावजूद इसका सीधा मतलब यह नहीं होगा कि दर्शक वीडियो को लंबे समय तक देख रहे हैं। यदि कोई यूजर 20 मिनट के वीडियो को शुरू करके कुछ ही सेकंड में बंद कर देता है, तब भी वह एक पूर्ण पब्लिक व्यू के रूप में दर्ज होगा।
प्लेटफॉर्म ने स्पष्ट किया है कि मुद्रीकरण (Monetization) और यूट्यूब पार्टनर प्रोग्राम (YPP) की पात्रता पर इसका नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा। क्रिएटर्स की वास्तविक आय और पार्टनर प्रोग्राम के मानक अभी भी 'एंगेज्ड व्यूज' (Engaged Views) और कुल वॉच-टाइम (Watch Hours) पर ही निर्भर करेंगे। इन आंकड़ों को क्रिएटर्स यूट्यूब एनालिटिक्स के एडवांस मोड में देख सकेंगे।
विज्ञापन और ब्रांड डील्स के बाजार पर भी इसका सीधा प्रभाव पड़ेगा। विश्लेषकों का मानना है कि अब ब्रांड्स और स्पॉन्सर्स केवल सतही पब्लिक व्यूज पर निर्भर रहने के बजाय ऑडियंस रिटेंशन और एवरेज व्यू ड्यूरेशन जैसे गंभीर आंकड़ों पर अधिक ध्यान देंगे, ताकि विज्ञापनों के वास्तविक प्रभाव का सटीक आकलन किया जा सके।