इंटरनेशनल डेस्क: रूस और जापान के बीच दूसरे विश्व युद्ध के दौर से चला आ रहा क्षेत्रीय विवाद एक बार फिर गरमा गया है। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने प्रशांत महासागर में स्थित विवादित कुरील द्वीप समूह के दक्षिणी द्वीप 'इतुरुप' का पहला आधिकारिक दौरा किया। पुतिन की इस यात्रा पर जापान ने बेहद तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की, जिसके बाद रूस ने मॉस्को स्थित जापानी राजदूत को तलब कर कड़ा विरोध दर्ज कराया है।
जापान की प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची ने राष्ट्रपति पुतिन के इस दौरे को जापानी जनभावनाओं के खिलाफ और पूरी तरह से अस्वीकार्य करार दिया। जापानी विदेश मंत्रालय ने कहा कि इतुरुप (जिसे जापान 'एतोरोफु' कहता है) ऐतिहासिक और अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत जापान का अभिन्न हिस्सा है। जापान का कहना है कि यूक्रेन युद्ध के कारण पहले से तनावपूर्ण चल रहे दोनों देशों के रिश्तों को इस कदम से और गहरा झटका लगा है।
जापान की इस आपत्ति पर मॉस्को ने भी सख्त रुख अपनाया। रूस के उप-विदेश मंत्री मिखाइल गलुज़िन ने जापानी राजदूत अकीरा मुतो को तलब कर दो टूक कहा कि दक्षिणी कुरील द्वीपों पर रूस की संप्रभुता अखंड और निर्विवाद है। रूसी विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद अंतरराष्ट्रीय समझौतों और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के तहत ये द्वीप सोवियत संघ को मिले थे, जिस पर सवाल उठाना पूरी तरह से गैर-कानूनी है। साथ ही, रूस ने चेतावनी दी कि टोक्यो द्वारा पश्चिमी प्रतिबंधों का समर्थन करने के कारण मॉस्को के पास जवाबी कार्रवाई करने का पूरा अधिकार सुरक्षित है।
गौरतलब है कि 1945 में द्वितीय विश्व युद्ध के अंत में सोवियत सेना ने इन द्वीपों पर नियंत्रण कर लिया था। इस क्षेत्रीय विवाद के चलते दोनों देशों के बीच आज तक कोई औपचारिक शांति समझौता नहीं हो सका है। पुतिन के इस ताजा दौरे और कूटनीतिक तल्खी ने प्रशांत क्षेत्र में भू-राजनीतिक तनाव को एक बार फिर चरम पर पहुंचा दिया है।