जम्मू-कश्मीर में अगले 48 घंटे के भीतर कुछ ऐसा होने वाला है, जिसका अंदाजा न कांग्रेस को होगा और ना ही महबूपा मुफ्ती कुछ सोच पाएंगी. इस बार बीजेपी जो दांव चलने वाली है उसे सुनकर बड़े-बड़े सियासी रणनीतिकार हिल जाएंगे और इसका फायदा ये होगा कि प्रदेश को पहली बार हिंदू डिप्टी सीएम मिल सकता है. वो हिंदू सीएम कौन होगा, उनके नाम पर मुहर कब लगी ये बताएं उससे पहले सुनिए कांग्रेस को कश्मीर में कितना बड़ा झटका लगने जा रहा है. सूत्र बताते हैं उमर अब्दुल्ला ने चुनाव जीतते ही जो कहा कि मोदी को केन्द्र से हटाए बिना 370 बहाली की बात करना मुर्खतापूर्ण है, हम सरकार बदलने का इंतजार करेंगे, फिर ये मुद्दा उठाएंगे. फिलहाल केन्द्र सरकार से अच्छे संबंध बनाए रखने की कोशिश करूंगा.
वो एक तरह से उनका सियासी सरेंडर था और बीजेपी को न्यौता था. न्यौता ये कि अटल बिहारी वाजपेयी ने जैसे हमें गले लगाया, आप भी हमें साथ ले लीजिए. दरअसल साल 1999 से 2002 के बीच फारुख अब्दुल्ला की पार्टी नेशनल कॉन्फ्रेंस एनडीए सरकार का हिस्सा थी, अटलजी प्रधानमंत्री और उमर अब्दुल्ला मंत्री हुआ करते थे. यब यहां समझना ये जरूरी है कि जब उमर अब्दुल्ला ने चुनाव कांग्रेस के साथ लड़ा तो फिर बीजेपी के साथ आने को क्यों छटपटा रहे हैं. तो इसकी 3 बड़ी वजहें हो सकती हैं.
अब्दुल्ला क्यों चाहते हैं कमल का साथ
ऐसे में एक सवाल ये भी उठ रहा है कि क्या उमर अब्दुल्ला के सपने में केजरीवाल आने लगे हैं, 13-14 अक्टूबर को जम्मू-कश्मीर में सीएम पद का शपथग्रहण होने की ख़बरें हैं, लेकिन उससे पहले उमर अब्दुल्ला नई कहानी बुनने में लगे हैं, जिसमें धारा 370 की वापसी के लिए वोट करने वालों की भावनाएं कोई मुद्दा नहीं है, अगर कोई मुद्दा है तो वो है सरकार बनाना, सीएम की कुर्सी हासिल करना, लेकिन इससे बीजेपी को क्या मिलेगा. तो बीजेपी को मिल सकता है प्रदेश का पहला डिप्टी सीएम. जबकि नेशनल कॉन्फ्रेंस के किसी बड़े नेता को मोदी सरकार में एंट्री मिल सकती है.
कौन होगा जम्मू-कश्मीर का डिप्टी सीएम
इन दोनों के अलावा कई बड़े नेता रेस में हैं, लेकिन इनकी रेस को मंजिल तभी मिलेगी, जब हाईकमान और अब्दुल्ला परिवार के बीच सहमति बनेगी, वरना ये भी हो सकता है कि उमर अब्दुल्ला 13 या 14 अक्टूबर को सीएम पद की शपथ लें, और अगले कुछ ही महीने में इस्तीफा देना पड़ जाए या सरकार गिर जाए, क्योंकि अलग-अलग राज्यों के सियासी हालात बताते हैं बड़ी मुश्किल से बहुमत तक पहुंचने वाले गठबंधन के विधायकों पर 5 साल भरोसा करना मुश्किल है,शायद इसीलिए फारुक अब्दुल्ला अब मोदी सरकार की तारीफ करने लगे हैं, जयशंकर के पाकिस्तान दौरे पर खुलकर कहते हैं, ये अच्छा कदम है, और उमर अब्दुल्ला कहते हैं अभी 370 पर कोई बात नहीं करेंगे.
जबकि उनकी सहयोगी पार्टी कांग्रेस के बड़े नेता आलोक शर्मा कहते हैं...अमित शाह केंद्रीय गृहमंत्री हैं, लेकिन उनको अभी तक ये नहीं पता है कि आर्टिकल 370 अभी भी संविधान का हिस्सा है. आपने केवल दो बदलाव किए हैं. अब सवाल ये है कि क्या बीजेपी को नेशनल कॉन्फ्रेंस से गठबंधन करना चाहिए, आप इस पर क्या सोचते हैं कमेंट कर बता सकते हैं.