गोंडा: मतदाता सूची पुनरीक्षण (SIR) की ड्यूटी में लगे एक सरकारी स्कूल शिक्षक ने कथित मानसिक प्रताड़ना से तंग आकर जहर खा लिया. मंगलवार देर रात इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई. मरने से पहले शिक्षक ने जो वीडियो रिकॉर्ड कराया, उसमें उन्होंने तरबगंज के SDM और नवाबगंज के BDO सहित एक लेखपाल को अपनी मौत का जिम्मेदार ठहराया है.
मृतक शिक्षक विपिन यादव (36) मूल रूप से जौनपुर जिले के रहने वाले थे और गोंडा के जैतपुर माझा प्राथमिक स्कूल में सहायक अध्यापक थे. वे BLO के रूप में SIR ड्यूटी कर रहे थे. परिजनों के अनुसार, पिछले कई दिनों से अधिकारी फोन पर लगातार दबाव बना रहे थे और अभद्र भाषा का इस्तेमाल कर रहे थे. मंगलवार सुबह करीब 7 बजे विपिन ने किराए के मकान में जहर खा लिया.
आनन-फानन में उन्हें जिला अस्पताल ले जाया गया, फिर स्थिति गंभीर देखते हुए लखनऊ KGMU रेफर कर दिया गया. रास्ते में सदर SDM अशोक कुमार खुद एम्बुलेंस में साथ थे, लेकिन KGMU पहुंचते-पहुंचते विपिन की सांसें थम गईं. अस्पताल में भर्ती होने के तुरंत बाद विपिन की पत्नी सीमा यादव ने उनका एक वीडियो बनाया, जिसमें वे बेहद कमजोर आवाज में कह रहे हैं, “मुझे तरबगंज SDM विश्वामित्र सिंह, नवाबगंज BDO रवि गुप्ता और लेखपाल लगातार परेशान कर रहे थे. काम को लेकर गाली-गलौज और धमकी दे रहे थे. मेरी मौत की जिम्मेदारी इन अधिकारियों की है.” पत्नी सीमा का कहना है कि पति पिछले 15-20 दिन से रात-दिन तनाव में थे और बार-बार कहते थे कि अधिकारी जान से मारने की धमकी दे रहे हैं.
वहीं जिला प्रशासन ने आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है. जिलाधिकारी प्रियंका निरंजन ने कहा कि विपिन यादव का मामला पारिवारिक कलह और निजी तनाव का है, न कि ड्यूटी के दबाव का. उन्होंने बताया कि उनके बूथ पर मात्र 700 वोटर थे, जिनमें से 350 का सत्यापन वे पहले ही पूरा कर चुके थे. DM ने यह भी कहा कि अंतिम वीडियो बयान में उकसावे की आशंका है और पत्नी की भूमिका की भी जांच होगी.
शिक्षक की मौत की खबर फैलते ही गोंडा और लखनऊ में शिक्षक संगठनों में आक्रोश फैल गया. कई जगह प्रदर्शन हुए. आशंका को देखते हुए प्रशासन ने भारी पुलिस बल तैनात कर दिया है. शव का पोस्टमॉर्टम कराया जा रहा है और मजिस्ट्रियल जाँच के भी आदेश दे दिए गए हैं. शिक्षक संगठनों ने मांग की है कि आरोपी अधिकारियों को तत्काल निलंबित किया जाए और मृतक परिवार को 1 करोड़ रुपये मुआवजा व पत्नी को सरकारी नौकरी दी जाए. SIR ड्यूटी में लगे अन्य शिक्षक भी अब डर के साये में काम कर रहे हैं और कई ने ड्यूटी छोड़ने की धमकी दी है.