Prateek Yadav Death : ज़िंदगी की कुछ तारीखें अमर हो जाती हैं, कुछ दर्दनाक दास्तां बन जाती हैं. मुलायम यादव की UP की सियासत में तूती बोलती थीं. साल 2007 में मायावती की सरकार में नेताजी के घर में छापा पड़ता है, उस वक्त दुनिया को पहली बार पता चला कि मुलायम सिंह यादव की दूसरी पत्नी का नाम साधना गुप्ता है और उनका एक बेटा जिसका नाम प्रतीक गुप्ता है, स्कूल के फॉर्म में पिता के नाम के आगे मुलायम सिंह यादव लिखा है! यहीं से मुलायम परिवार की वो कहानी खुलती है जिसपर किसी को यक़ीन नहीं होता है. मुलायम सिंह यादव के घर में धूम-धाम से प्रतीक की शादी हुई, लेकिन उनकी मौत इतनी ख़ामोशी से कैसे हो गई.
ये उस वक्त की बात है जब 2011 में अखिलेश यादव साइकिल यात्रा निकाल रहे थे,तब प्रतीक घोड़ी पर चढ़े थे!
ठीक एक दशक बाद मुलायम का कुनबा बिखर जाता है, अखिलेश-डिंपल का साथ छोड़ अपर्णा-प्रतीक अलग होते हैं!अपर्णा BJP में शामिल हुईं और प्रतीक परिवार से दूर हो गए, प्रॉपर्टी के कारोबार में नुकसान हुआ तो वो टूट गए. प्रतीक की शादी की कई तस्वीरें है, अखिलेश यादव और मुलायम सिंह यादव ने मिलकर धूम-धाम से शादी की थी, अनिल अंबानी से लेकर अमिताभ बच्चन जैसे दिग्गज मेहमानों से घर सजा था.
डिंपल यादव और प्रतीक के बीच कोई अनबन नहीं थी, प्रतीक और अखिलेश यादव में भी सबकुछ ठीक था, प्रतीक की मां साधना गुप्ता कई बार अपने बेटे को कुर्सी का हक़दार बतातीं, लेकिन प्रतीक ने हमेशा अखिलेश यादव को मुलायम की कुर्सी का हक़दार बताया! हालांकि ये कहानी यहां पूरी नहीं होती...अपर्णा और प्रतीक में विवाद की ख़बरें आई, मुलायम सिंह की मौत के बाद परिवार बिखर गया, अखिलेश यादव जैसा भाई प्रतीक के हिस्से में था लेकिन भाई के साथ का भाग्य क्यों नसीब नहीं हुआ.
प्रतीक अपने भाई अखिलेश के बारे कई बार कह चुके हैं कि पिता मुलायम सिंह यादव के राजनीतिक विरासत के असली हक़दार अखिलेश भैया हैं, फिर अगर प्रतीक किसी संकट में थे तो अखिलेश को ख़बर क्यों नहीं मिली. दो महीने पहले मुलाकात हुई थी, लेकिन क्या उस वक्त कोई बात नहीं हुई थी.
13 मई की सुबह करीब 5 बजकर 55 मिनट पर प्रतीक को मृत अवस्था में अस्पताल पहुंचा गया, फिर 12 मई की रात में क्या हुआ, प्रतीक को किसने मारा, शरीर पर चोट के निशान क्यों थे. अस्पताल पहुंचने से पहले जान कैसे निकल गई थी, उनका दिल डॉक्टरों ने सहेज कर क्यों रख लिया है, सियासी घराने की ये मौत मिस्ट्री बन चुकी है. अखिलेश यादव खुद जांच की मांग करते हैं, भाई की मौत की ख़बर सुनकर सुबह-सुबह दौड़ते अस्पताल पहुंचे लेकिन प्रतीक तब तक हमेशा के लिए सो चुके थे.
प्रतीक की ज़िंदगी कुछ साल पहले तक एकदम फिल्मी थी, महंगी और लग्जरी गाड़ियों का शौक था, मुलायम सिंह यादव ने कभी प्रतीक को नहीं रोका, महंगी गाड़ियों के साथ उनकी फोटो मीडिया में वायरल रहती, वक्त के साथ उन्होंने प्रॉपर्टी का काम शुरू किया, लखनऊ में जिम भी खोला, लेकिन उनके हाथ से वक्त छूटता चला गया. लग्जरी ज़िंदगी जीने वाले प्रतीक गुमशुम होते चले गए, वजह क्या थी.
अपर्णा यादव बीजेपी में आई तो परिवार से दूरी बनाकर आई, न भाई अखिलेश का आशीर्वाद लिया ना भाभी डिंपल के साथ ख़ास रिश्ता बचा. जिस राजनीतिक हलचल के बीच प्रतीक बड़े हुए उन्हें वो सबकुछ परिवार से दूर होकर नहीं मिला, सबकुछ मुलायम सिंह यादव के परिवार में ठीक नहीं हो रहा है, चंद सालों में ये तीसरी मौत है, पहले पत्नी साधना गुप्ता की मौत, फिर खुद नेताजी और अब उनके बेटे प्रतीक की मौत ने हर किसी को तोड़ दिया.
सियासत में कोई किसी का नहीं होता है, लेकिन मौत अपनों के कंधे झुका देती है, योगी आदित्यनाथ जब श्रदांजलि देने पहुंचे तो उनके बगल में हाथ जोड़े अपर्णा यादव खड़ी थी, उनके माथे का सिंदूर सामने पार्थिव शरीर बन चुका था, मांग से सिंदूर और ज़िंदगी से मुलायम सिंह की बहू होने का तमगा भी छिन चुका था.