नई दिल्ली: बुल्गारिया की मशहूर भविष्यवक्ता बाबा वेंगा एक बार फिर चर्चा में हैं. क्यों बाबा वेंगा द्वारा 2026 के लिए बताए गए आर्थिक संकट के संकेत नजर आने लगे हैं. उनका दावा था कि एक वक्त ऐसा आएगा, जब आम लोगों को सोना देखने तक के लिए नसीब नहीं होगा. ताजा घटनाक्रम को देखते हुए इसका अंदाजा लगाया जा सकता है. सरकार द्वारा सोने और चांदी पर आयात शुल्क 6% से बढ़ाकर 15% करने के फैसले के बाद घरेलू बुलियन बाजार में बुधवार को जबरदस्त तेजी दर्ज की गई. इस कदम का मकसद अनावश्यक आयात घटाना और बढ़ते चालू खाता घाटे को नियंत्रित करना है.
कीमतों में कितनी तेजी आई?
MCX पर चांदी के भाव में करीब 7% या 18,500 रुपए से अधिक की बढ़ोतरी हुई और भाव 2.97 लाख रुपए प्रति किलो के ऊपर पहुंच गया. वहीं सोना भी लगभग 6% यानी 9,000 रुपए महंगा होकर 1.62 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम तक जा पहुंचा. इस उछाल की मुख्य वजह आयात लागत में हुई वृद्धि है. इसके अलावा अमेरिका में महंगाई को लेकर बनी अनिश्चितता और पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने भी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमती धातुओं को मजबूती दी है.
ज्वेलरी कारोबार पर असर
विशेषज्ञों का अनुमान है कि ऊंची कीमतों से ज्वेलरी की मांग पर दबाव पड़ेगा. RiddiSiddhi Bullions के प्रबंध निदेशक पृथ्वीराज कोठारी ने मीडिया को बताया कि अगर भाव और बढ़े तो गोल्ड कॉइन और ETF की मांग भी कमजोर हो सकती है. साथ ही, फिर से स्मगलिंग बढ़ने का खतरा पैदा हो सकता है.
आगे क्या होगा कीमतों का रुख?
LKP Securities के जतीन त्रिवेदी बताते हैं, घरेलू बाजार में आई यह तेजी मुख्य रूप से बढ़ी हुई आयात लागत का नतीजा है. अब निवेशकों की नजर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की चीन यात्रा पर होगी, जहां ट्रेड टैरिफ और ईरान से जुड़े मुद्दों पर संकेत मिल सकते हैं. तकनीकी रूप से COMEX गोल्ड को 4,650 डॉलर के आसपास मजबूत सपोर्ट मिल रहा है.
निवेश की दिशा बदल सकती है
Aikyam Capital के विशाल त्रेहन का कहना है कि भारत का व्यापार घाटा मुख्य रूप से कच्चे तेल और सोने के आयात से प्रभावित होता है. ड्यूटी बढ़ने से लोग अब म्यूचुअल फंड, बॉन्ड और शेयर बाजार जैसे वित्तीय परिसंपत्तियों की ओर ज्यादा रुझान दिखा सकते हैं. Kotak Securities के अनिंद्य बनर्जी ने बताया कि कि लंबी अवधि में सेंट्रल बैंकों की खरीदारी और करेंसी हेजिंग सोने को सपोर्ट देते रहेंगे.
ग्राहक क्या करेंगे?
Bonanza Portfolio के बालाजी राव मुदिली बताते हैं कि महंगाई के इस माहौल में लोग हल्की वजन वाली और कम कैरेट की ज्वेलरी की तरफ मुड़ सकते हैं. कई ग्राहक पुराने सोने को एक्सचेंज करके नई डिजाइन वाली ज्वेलरी लेने का विकल्प चुन सकते हैं. वहीं Artha Bharat Investment Managers के सचिन सावरिकर ने कहा कि भारत में सोना सिर्फ निवेश नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और बचत की परंपरा से जुड़ा है. इसलिए केवल आयात पर रोक लगाने से मांग कम नहीं होगी.
निवेशकों के लिए क्या है सलाह?
वर्तमान में कीमतें काफी ऊंचे स्तर पर हैं. नये निवेश से पहले वैश्विक संकेतों, डॉलर-रुपया दर और तकनीकी स्तरों को ध्यान में रखें. लंबी अवधि के निवेशकों को सेंट्रल बैंक खरीदारी जैसे सकारात्मक कारकों पर नजर रखनी चाहिए.