MLA Uma Shankar Singh : उत्तर प्रदेश की राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाने वाले बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के वरिष्ठ नेता और बलिया की रसड़ा विधानसभा सीट से लगातार तीन बार विधायक रहे उमाशंकर सिंह का बुधवार देर रात निधन हो गया. वे लंबे समय से कैंसर से जूझ रहे थे और दिल्ली के फोर्टिस अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था. उनके निधन की खबर मिलते ही बलिया समेत पूरे प्रदेश में शोक की लहर दौड़ गई. उनके आवास पर सुबह से ही समर्थकों, कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों की भीड़ जुटने लगी.
उमाशंकर सिंह उन चुनिंदा नेताओं में शामिल थे जिन्होंने बसपा के कठिन दौर में भी अपनी राजनीतिक पकड़ बनाए रखी। वर्ष 2012, 2017 और 2022 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने लगातार जीत दर्ज की. खास बात यह रही कि 2017 में भाजपा की प्रचंड लहर और 2022 में बसपा के खराब प्रदर्शन के बावजूद उन्होंने रसड़ा सीट पर पार्टी का परचम लहराया. 2022 में वे उत्तर प्रदेश विधानसभा में बसपा के इकलौते विधायक बनकर पहुंचे थे.
रसड़ा क्षेत्र में उनका मजबूत जनाधार माना जाता था. 2012 में उन्होंने संग्राम सिंह यादव को हराया, 2017 में भाजपा के राम इकबाल सिंह को मात दी और 2022 में भाजपा-सुभासपा गठबंधन के उम्मीदवार महेंद्र चौहान को पराजित कर लगातार तीसरी जीत हासिल की. राजनीति के अलावा उमाशंकर सिंह एक सफल कारोबारी भी थे. उनकी पहचान छात्र शक्ति कंस्ट्रक्शन और सीएस इंफ्रा कंस्ट्रक्शन लिमिटेड से जुड़ी रही.
प्रदेश की सड़कों पर दौड़ने वाले कई ट्रकों और डंपरों पर लिखा "छात्र शक्ति" उनके प्रभाव और व्यवसाय की अलग पहचान माना जाता था. उनकी पत्नी कंपनी में प्रबंध निदेशक (एमडी) की जिम्मेदारी निभा रही हैं.
2022 के चुनावी हलफनामे के अनुसार उनकी घोषित संपत्ति करीब 40 करोड़ रुपये से अधिक थी, जो पिछले वर्षों में लगातार बढ़ी. छात्र राजनीति से सार्वजनिक जीवन की शुरुआत करने वाले उमाशंकर सिंह ने संगठन और क्षेत्रीय राजनीति में अपनी अलग छवि बनाई. बसपा प्रमुख मायावती से उनके बेहद करीबी संबंध थे और बताया जाता है कि रक्षाबंधन पर मायावती उन्हें राखी भी बांधती थीं. उनके निधन से बसपा ने अपना सबसे मजबूत विधायी चेहरा खो दिया है और रसड़ा विधानसभा सीट के भविष्य को लेकर भी राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं.