लखनऊ: 22 जून को लखनऊ में हुए भीषण अग्निकांड के ठीक 32 दिन बाद प्रशासन ने उस दर्दनाक इमारत को बुलडोजर से ढहा दिया, जहां आग लगने से 15 लोगों की मौत हो गई थी. शनिवार को भारी सुरक्षा के बीच लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) की टीम ने तीन मंजिला इस इमारत को पूरी तरह तोड़ दिया. पूरे इलाके को सील कर दिया गया और भारी पुलिस बल तैनात किया गया ताकि कोई अप्रिय घटना न हो.
इस इमारत में कोचिंग सेंटर समेत कई व्यावसायिक संस्थान चल रहे थे. आग लगने के बाद जांच में सामने आया कि इमारत को रिहायशी उपयोग की मंजूरी मिली थी, लेकिन उसका व्यावसायिक इस्तेमाल हो रहा था. अग्नि सुरक्षा के नियमों का पालन नहीं किया गया था और आपातकालीन निकासी की पर्याप्त व्यवस्था भी नहीं थी. आग इतनी तेजी से फैली कि कई लोग अंदर फंस गए और अपनी जान गंवा बैठे.
जानकारी के अनुसार, इस इमारत के खिलाफ साल 2016 में भी अवैध निर्माण को लेकर कार्रवाई हुई थी, लेकिन बाद में गिराने का आदेश वापस ले लिया गया था. इसके चलते इमारत सालों तक चलती रही. हादसे के बाद LDA ने मालिकों को नोटिस जारी किया और तय समयसीमा के बाद बुलडोजर एक्शन लिया गया.
इस कार्रवाई से प्रशासन की लापरवाही पर एक बार फिर सवाल उठ रहे हैं. लोग पूछ रहे हैं कि जब पहले ही अवैध निर्माण की शिकायत थी तो समय रहते सख्त कदम क्यों नहीं उठाए गए. हादसे के बाद इमारत के मालिकों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है और अधिकारियों की भूमिका की भी जांच चल रही है.
प्रशासन अब मंजूर नक्शे के विपरीत इस्तेमाल हो रही इमारतों के खिलाफ अभियान चला रहा है, लेकिन जिन परिवारों ने इस अग्निकांड में अपने सदस्यों को खोया है, उनके लिए सिर्फ इमारत गिराना काफी नहीं. वे अब भी जवाब चाहते हैं कि इस हादसे को रोका क्यों नहीं जा सका.