West Bengal Kailash Vijayvargiya Case: पश्चिम बंगाल में मध्य प्रदेश के मंत्री कैलाश विजयवर्गीय पर दर्ज आपराधिक मामलों को लेकर राजनीतिक बहस गरमा गई है. इंदौर से भाजपा सांसद शंकर लालवानी ने दावा किया कि ये सभी मामले राजनीतिक बदले की भावना से दर्ज किए गए थे. उन्होंने कहा कि बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान विजयवर्गीय ने भाजपा के लिए जमकर मेहनत की, जिसका जवाब विपक्षी सरकार ने फर्जी मुकदमों से दिया. लालवानी ने न्याय व्यवस्था पर भरोसा जताते हुए कहा कि समय के साथ ये सारे झूठे केस वापस ले लिए जाएंगे.
विजयवर्गीय का भावुक बयान
मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने खुद इस मुद्दे पर बात करते हुए बताया कि उनके खिलाफ बंगाल में 38 आपराधिक मामले दर्ज हैं. प्रेस कॉन्फ्रेंस में वे भावुक हो गए और कहा कि उनके ऊपर बलात्कार और बाल तस्करी जैसे बेहद गंभीर और अपमानजनक आरोप लगाए गए. उन्होंने इन सबको साफ तौर पर राजनीतिक साजिश बताया.
विजयवर्गीय ने याद किया कि चुनाव प्रचार के दौरान उन पर पत्थर और बम भी फेंके गए. उन्होंने कहा कि अगर वे आज सुरक्षित हैं तो इसका श्रेय केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को जाता है.
कांग्रेस ने साधा निशाना
इस पर कांग्रेस ने तेज पलटवार किया. पार्टी के मीडिया विभाग प्रमुख मुकेश नायक ने कहा कि विजयवर्गीय को पहले चुनाव आयोग को जवाब देना चाहिए. उनका आरोप है कि मंत्री ने नामांकन के समय दाखिल हलफनामे में इन मामलों की पूरी जानकारी नहीं दी, जो गंभीर उल्लंघन है. नायक ने तंज कसते हुए कहा, ''जब सैयां ही कोतवाल बन जाएं तो डर किसका?'' उन्होंने सत्ता का दबाव इस्तेमाल कर केस वापस करवाने की कोशिश का आरोप भी लगाया.
सियासी घमासान तेज
भाजपा इसे राजनीतिक प्रतिशोध का मामला बता रही है, जबकि कांग्रेस इसे चुनावी प्रक्रिया की शुचिता और कानूनी मुद्दे से जोड़कर देख रही है. अब यह विवाद सिर्फ राजनीति तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि चुनाव आयोग, न्यायपालिका और राजनीतिक नैतिकता से भी जुड़ गया है. आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और तीखी बहस होने की संभावना है.