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नई दिल्ली: पूरा देश जब केजरीवाल के महाघोटाले पर चर्चा कर रहा था, ईडी और सीबीआई की टीम हिंदुस्तान के इतिहास का सबसे भयंकर फ्रॉड खोलने में लगी थी. 25 फरवरी की सुबह से लेकर रात तक सीबीआई की टीम ने एक साथ 6 शहरों के 60 ठिकानों पर छापा मारा. दिल्ली से लेकर पुणे, चंडीगढ़, महाराष्ट्र के नांदेड़, कोल्हापुर और बेंगलुरू में जब सीबीआई की टीम पहुंची तो उसे कैश नहीं बल्कि डिजिटल नोट हाथ लगे. आप कहेंगे ये कौन सा नोट है, तो वो बताएं उससे पहले इस छापे की पूरी कहानी जान लीजिए, ताकि हिंदुस्तान के पहले ऐसे केस की कहानी समझ सकें.
ये केस ऐसा है, जिसने सुप्रीम कोर्ट के जज से लेकर सीबीआई के अधिकारियों तक को हिलाकर रख दिया. सुप्रीम कोर्ट ने बीते साल नवंबर महीने में फाइल देखी, तो जांच के आदेश दिए, ईडी ने सबसे पहले जांच शुरू की, फिर सीबीआई की एंट्री हुई, ईडी ने इसी साल फरवरी महीने में कोर्ट में चार्जशीट दायर की, जिसमें लिखा था... अमित भारद्वाज नाम के व्यक्ति ने डिजिटल मुद्रा बिटक्वाइन में निवेश के नाम पर एक कंपनी बनाई, जिसमें अजय भारद्वाज, महेंद्र भारद्वाज और सिंपी भारद्वाज समेत कई लोग शामिल थे.
ये कंपनी में पैसा लगाने वालों को 10 फीसदी मोटे मुनाफे का लालच देते. शिल्पा शेट्टी के पति राज कुंद्रा को भी अजय ने 285 बिटक्वाइन दिए थे, जिसकी कीमत करीब 150 करोड़ थी, लेकिन वो डील पूरी नहीं हो पाई. छापेमारी के दौरान डिजिटल रिकॉर्ड, प्रॉपर्टीज से जुड़े कागजात, महंगी घड़ियां, मर्सिडीज और ऑडी जैसी कार मिली है. ईडी ने ये भी कहा कि अमित भारद्वाज इस दुनिया में अब नहीं है, लेकिन उसके सहयोगी अजय और महेंद्र फरार हैं. अजय की पत्नी सिंपी ने उनके भागने में मदद की, सिंपी, नितिन गौर और निखिल महाजन ने पूछताछ में ये भी बताया कि दुबई और मकाऊ में इन्होंने प्रमोशनल इवेंट भी किए थे, जहां लोगों को गेन बिटक्वाइन में पैसा लगाने के लोगों को फायदे गिनवाए गए. उन्हें लालच दिया गया. सारा पैसा नितिन के खाते में आया, क्योंकि नितिन अजय का साला था.
ये लोग इस खेल को इतनी सावधानी से अंजाम दे रहे थे कि बिटक्वाइन इथेरियम, यूएसडीटी और ट्रोन जैसी क्रिप्टो करेंसी की नकली वेबसाइट भी बनवा ली थी, जहां से ये करोड़ों का ट्रांजेक्शन करते. चूंकि बिटक्वाइन एक डिजिटल मुद्रा है, आसान भाषा में कहें तो डिजिटल नोट है, जिसे आप छू नहीं सकते, बल्कि सिर्फ ऑनलाइन गेम की तरह महसूस कर सकते हैं. इसलिए इसे डिजिटल नोट भी कहा जाता है.
करीब 6600 करोड़ का खेल अभी खुला है, लेकिन सीबीआई इनके बताए ठिकानों पर अभी भी छापा मारने में जुटी है, जहां से इस घोटाले को लेकर और बड़ा खुलासा होने की उम्मीद है. चूंकि पूरी कहानी ऑनलाइन फ्रॉड से जुड़ी है, इसलिए जो डाटा डिलीट किए गए हैं, उन्हें रिकवर करवाने के लिए सीबीआई और ईडी की टीम बड़े-बड़े तकनीकी एक्सपर्ट की मदद ले रही है. ये केस इसलिए भी बड़ा है क्योंकि इससे पूर्व आईपीएस और कई नेताओं के नाम भी जुड़े. महाराष्ट्र चुनाव के वक्त बीजेपी ने चार ऑडियो शेयर कर एनसीपी नेता सुप्रिया सुले पर गंभीर आरोप लगाए.
एक ऑडियो में सुप्रिया अंग्रेजी में कहती हैं, गौरव आप हमें जवाब क्यों नहीं दे रहे हैं, हमें कैश पहले चाहिए. आपका कोई भी आदमी जवाब नहीं दे रहा है, हमसे गेम मत खेलो. सारे पैसे आपके पास हैं, तुरंत फोन करें. चुनाव चल रहे हैं और हमें पैसों की जरूरत है. दूसरे ऑडियो में IPS ऑफिसर अमिताभ गुप्ता के आवाज होने का दावा किया जाता है, जिसमें वो कहते हैं गौरव आप मेरे और भाग्यश्री के साथ हुई सारी चैट, बिटकॉइन, BHR से जुड़ा डेटा डिलीट करें. अगले हफ्ते 100 करोड़ की जरूरत है. तैयार रखें. विनोद भी आपको 25 करोड़ देगा, कुछ बड़ा होने वाला है.
ऐसे ही तीसरे और चौथे ऑडियो में लेन-देन की बात होती है, लेकिन सुप्रिया सुले इन आरोपों को साजिश बताती हैं, और ईडी-सीबीआई से खुद जांच की मांग करती हैं, लेकिन सच और झूठ से बड़ा सवाल ये है कि हमारे देश की सारी एजेंसियां इतना बड़ा खेल होने के बाद ही क्यों जागती हैं. वो पहले अलर्ट क्यों नहीं होती, ये पैसा तो आपके और हमारे टैक्स का ही है, ऐसे मामलों पर आपकी चुप्पी आपका ही नुकसान करवा सकती है.