अभिषेक चतुर्वेदी
हैल्लो रेल मंत्री जी, ट्रेन के नीचे और पटरियों के बीच फंसा यात्री बोल रहा हूं, टिकट का पूरा पैसा दिया था, पर हमारी माता घर की जगह श्मशान पहुंच गईं. आप जांच बिठाओगे, कुछ लोगों को सस्पेंड करोगे, पर हमें वो नहीं चाहिए. हमें चाहिए गारंटी, क्योंकि हम ही नहीं रहेंगे तो आपकी ट्रेन में बैठेगा कौन. लाखों करोड़ का मुनाफा आपको देगा कौन.
देश की आबादी है 140 करोड़, आपके पास ट्रेन की संख्या है करीब 9 हजार, बिहार-यूपी जाने वाली ट्रेनों में ठूंस-ठूंसकर यात्री ऐसे भरे होते हैं. जैसे कोई टमाटर-प्याज की बोरी रखी हो. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की तरह ये मत कहना मैं तो प्याज खाता ही नहीं, आप मंत्री क्यों हैं. हमारी समस्या सुलझाने के लिए, देश को आगे बढ़ाने के लिए, पर 150 की स्पीड वाली ट्रेन जब नहीं संभल रही है, तो 250 की स्पीड वाली बुलेट ट्रेन कैसे संभलेगी.
मानता हूं, जिम्मेदारी बड़ी है, हर तरफ परेशानी खड़ी है, कभी वंदे भारत पर कोई पत्थर फेंक देता है, तो कभी पटरियों पर पत्थर रखने वाले पकड़े जाते हैं, पर इससे निपटना भी तो आपका काम है. अधिकारी लापरवाह हैं, तो योगीजी की तरह बुलडोजर चला दीजिए, फंड नहीं है तो लोगों से चंदा ले लीजिए. 500-500 रुपये भी चंदा के नाम पर लेंगे तो 70 हजार करोड़ हो जाएगा. इतने में 70000 किलोमीटर तक नई पटरी बिछ जाएगी.
अंग्रेजों के जमाने की पटरियां पुरानी हो गई है, ये बात हादसे के बाद हर अधिकारी कह देता है, तो बदल दीजिए, देश के रेलवे ट्रैक की लंबाई 1 लाख 26 हजार 366 किलोमीटर है, 70 हजार किलोमीटर जनता चंदा देकर बदलवा देगी. बाकी आप सरकारी खजाने से बदल लीजिए, इतना भी पैसा खजाने में नहीं है तो सांसदों, मंत्रियों और विधायकों की जमा पूंजी मांग लीजिए, तब तो 2 लाख किलोमीटर का नया ट्रैक भी बन जाएगा और अगर ये भी नहीं कर पाएंगे तो देश की जनता के 5 सवालों का जवाब दे दीजिए, उसमें आपके इस्तीफे का सवाल नहीं है, घबराइए मत.
पहला सवाल ये है कि 12 महीने में 7 बड़ी घटनाएं हुईं, क्या उन ट्रेनों से दोबारा ऐसा न हो, ये आपके अधिकारी सुनिश्चित कर पाए? बाकी ट्रेन तो तभी ठीक होंगी, जब पहले खराब वाली सही हो?
दूसरा सवाल ये है, ट्रेन में यात्रियों की सुरक्षा के लिए RPF मुस्तैद होते हैं, पटरियों की सुरक्षा के लिए कोई प्लान होगा या यूं ही चलता रहेगा?
तीसरा सवाल ये है, राजधानी जैसी ट्रेन वाला सिस्टम क्या बाकी ट्रेन में नहीं लग सकता, ताकि वो समय पर पहुंचे और इस तरह की घटनाएं न हो?
चौथा सवाल ये है, वंदे भारत जैसी कई ट्रेन भविष्य में भी आएंगी, जिनकी स्पीड अभी के ट्रेन से ज्यादा होगी तो उनके लिए क्या इंतजाम है?
पांचवां सवाल ये है, विपक्ष में रहकर यात्रियों की दशा दिखती है, सत्ता में जाते ही ऐसी क्या दिक्कत होती है, समस्या का समाधान पूरी तरह नहीं हो पाता?
रेल मंत्री तक ऐसे पहुंचाए शिकायत?
फिलहाल रेल मंत्रालय तक शिकायत पहुंचाने के 3 तरीके हैं, WWW.indianrailwaysgov.in पर जाकर ऑनलाइन शिकायत कर सकते हैं. 182 पर कॉल कर सकते हैं, +919717680982 पर मैसेज कर सकते हैं, या फिर @RailMindia पर ट्विट कर सकते हैं. ट्विट से मदद जल्दी मिलती है, लेकिन अब जरूरत सिर्फ मदद की नहीं, बल्कि ऐसी घटनाओं को रोकने की है, जिसके लिए आपको भी आगे आना होगा और रेल मंत्री के नाम इस संदेश में कमेंट करके अपनी पीड़ा लिखनी होगी, अपने नाम के साथ अपनी शिकायत लिखें, ताकि ये सरकार तक पहुंचे और ये ख़बरें बंद हो कि फलां जगह ट्रेन पटरी से उतर गई, फलां जगह पटरी पर पत्थर मिले.
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