Pakistan-Afghanistan War: चीन ने पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच बढ़ते तनाव पर गहरी चिंता जताई है और दोनों देशों से सैन्य झड़पों को रोककर बातचीत के रास्ते अपनाने की अपील की है. बीजिंग का कहना है कि बल प्रयोग से स्थिति और जटिल हो जाएगी, जिससे पूरे इलाके में अस्थिरता फैल सकती है. चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने अफगानिस्तान के कार्यवाहक विदेश मंत्री अमीर खान मुत्तकी से फोन पर बातचीत की.
इस दौरान वांग ने जोर देकर कहा कि दोनों पड़ोसियों के बीच के मतभेदों को केवल संवाद और परामर्श से ही सुलझाया जा सकता है. उन्होंने तत्काल युद्धविराम की मांग की, संयम बरतने का आह्वान किया और आमने-सामने वार्ता शुरू करने पर बल दिया. चीन ने मध्यस्थता करने की पेशकश भी की है ताकि क्षेत्रीय शांति बनी रहे.
यह बयान ऐसे समय में आया है जब दोनों तरफ से बॉर्डर पर हिंसक झड़पें जारी हैं. अफगानिस्तान के रक्षा मंत्रालय ने दावा किया कि कुनार और नंगरहार प्रांतों में उसने पाकिस्तानी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया और कई पाकिस्तानी सैनिक मारे गए. वहीं पाकिस्तान ने अफगानिस्तान में छिपे आतंकी ठिकानों पर हमलों का दावा किया है, जिसमें हवाई कार्रवाई भी शामिल है. इन घटनाओं से सीमा पर तनाव चरम पर पहुंच गया है और दोनों पक्ष एक-दूसरे पर उल्लंघन का आरोप लगा रहे हैं.
पाकिस्तान और अफगानिस्तान के रिश्ते पिछले कुछ महीनों से लगातार खराब हो रहे हैं, लेकिन हाल के हफ्तों में स्थिति और बिगड़ गई है. बॉर्डर पर गोलीबारी, ड्रोन हमले और हवाई कार्रवाइयों ने युद्ध जैसी स्थिति पैदा कर दी है. चीन, जो दोनों देशों का करीबी साझेदार है, पहले भी इस तनाव को कम करने की कोशिश कर चुका है. हाल ही में चीनी विशेष दूत ने काबुल का दौरा किया था और दोनों राजधानियों से लगातार संपर्क बनाए हुए है.
बीजिंग की यह कोशिश इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि क्षेत्र में बढ़ता संघर्ष उसके आर्थिक हितों और क्षेत्रीय स्थिरता को प्रभावित कर सकता है. चीन ने साफ कहा है कि विवादों का हल सिर्फ डिप्लोमैटिक तरीकों से ही निकल सकता है, न कि हथियारों से.