दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पर चीन की 'नेल हाउस' वाली जिद देखी गई

Amanat Ansari 25 Apr 2026 05:41: PM 4 Mins
दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पर चीन की 'नेल हाउस' वाली जिद देखी गई

नई दिल्ली: 2025 में, चीन के एक भूमि मालिक और टोफू विक्रेता ये युशोउ (Ye Yushou) ने पूर्वी चीन के जियांग्शी प्रांत के जिन्क्सी काउंटी में G206 हाईवे के निर्माण के लिए सरकार को अपनी संपत्ति अधिग्रहण करने नहीं दी. हाईवे का निर्माण पूरा हो गया, लेकिन उनका घर बिल्कुल उसी जगह पर बना रहा. अधिकारियों को परियोजना का रूट बदलना पड़ा और हाईवे को उसके चारों ओर घुमाकर बनाना पड़ा. बाद में इस संरचना को "नेल हाउस" (Nail House) के नाम से जाना जाने लगा.

यह चीन से रिपोर्ट की गई सबसे हालिया नेल हाउस की घटना थी. चीनी सरकार से जमीन छोड़ने से इनकार करने वाले भूमि मालिकों के कई मामले सामने आ चुके हैं. अब भारत में भी "नेल हाउस" वाली इसी तरह की जिद देखने को मिली है.

गाजियाबाद, उत्तर प्रदेश के मंडोला गांव में एक घर ने दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे के महत्वपूर्ण हिस्से को रोक रखा है. 14 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस परियोजना का उद्घाटन किया, लेकिन 213 किलोमीटर लंबे इस खंड पर "स्वाभिमान" नाम का एक घर सर्विस रोड के ठीक बीच में खड़ा है.

213 किलोमीटर लंबा दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे दोनों शहरों के बीच यात्रा का समय लगभग 6 घंटे से घटाकर मात्र 2 से 2.5 घंटे कर देगा. इस परियोजना की अनुमानित लागत लगभग 12,000 से 13,000 करोड़ रुपये थी. यह छह लेन वाली एक्सेस-कंट्रोल्ड डिजाइन वाली सड़क है, जिसकी स्पीड लिमिट 100 किमी प्रति घंटा है. इस कॉरिडोर में 14 वेज-साइड सुविधाएं, कई पुल, इंटरचेंज और रेल ओवरब्रिज शामिल हैं.

लेकिन चीन के नेल हाउस की तरह, "स्वाभिमान" घर शाब्दिक और लाक्षणिक रूप से नहीं हिला है. इंडिया टुडे ग्रुप अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि लगभग 1,600 वर्ग मीटर में फैला दो मंजिला घर है. बाहर से "कोई है?!" चिल्लाने पर संपत्ति का सिक्योरिटी गार्ड आया. मालिक के बारे में पूछने पर गार्ड ने जवाब दिया, "मालिक नोएडा में रहते हैं."

इस घर पर भूमि विवाद 1998 से चल रहा है. घर के मालिक, स्वर्गीय डॉ. वीरसेन सरोहा ने उत्तर प्रदेश हाउसिंग बोर्ड द्वारा मंडोला हाउसिंग स्कीम के लिए अपनी जमीन अधिग्रहण करने के खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी थी. अधिकारियों ने क्षेत्र के छह गांवों से 2,614 एकड़ जमीन अधिग्रहण करने की नोटिफिकेशन जारी की थी, जिसमें प्रति वर्ग मीटर 1,100 रुपए मुआवजा देने की पेशकश की गई थी. सरोहा इस नोटिफिकेशन से सहमत नहीं हुए और अधिक मुआवजे की मांग करते हुए अदालत गए.

द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, फिलहाल यह जमीन स्वर्गीय सरोहा के पोते लक्ष्यवीर सरोहा के नाम पर है. हाउसिंग स्कीम पूरी नहीं हो सकी. वर्ष 2020 में, नेशनल हाईवेज अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) ने दिल्ली के अक्षरधाम से उत्तराखंड के देहरादून तक एक्सप्रेसवे शुरू करने का फैसला किया. अधिकारियों को मंडोला में सर्विस रोड बनाने के लिए सरोहा परिवार की ठीक उसी जमीन की जरूरत थी, ताकि देहरादून से आने वाले वाहन वहां से निकलकर पंचलोक (लोनी के पास) जा सकें.

जबकि विवाद अभी भी इलाहाबाद हाईकोर्ट में लंबित था, लक्ष्यवीर ने अपने घर के डेमोलिशन के खतरे का हवाला देते हुए 2024 में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की. सुप्रीम कोर्ट ने स्टेटस को बनाए रखने का निर्देश दिया, जिसमें किसी भी तरह के डेमोलिशन या आगे निर्माण पर रोक लगा दी गई. साथ ही हाईकोर्ट से मामले की सुनवाई जल्द पूरा करने को कहा गया.

चीन के नेल हाउस मालिक को फैसले पर पछतावा

चीन के कई नेल हाउस मामलों में एक घटना खास तौर पर उल्लेखनीय है. नेल हाउस के मालिक ये युशोउ ने शुरू में हाईवे निर्माण के लिए अपनी घर बेचने से इनकार कर दिया था. लेकिन जब परियोजना पूरी हो गई और सड़क उनके घर के चारों ओर बन गई, तो उनकी जिद पछतावे में बदल गई. हांगकांग स्थित साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट के अनुसार, युशोउ ने शुरू में 1.6 मिलियन युआन (लगभग 2,20,000 डॉलर) के मुआवजे और वैकल्पिक आवास की पेशकश ठुकरा दी थी. उन्होंने बेहतर डील की उम्मीद की थी और 2 मिलियन युआन तथा तीन होमस्टेड की मांग की थी.

साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने माना कि यह फैसला "जुआ हारने" जैसा लग रहा है, क्योंकि अधिकारियों ने उनकी मांगें मानने की बजाय उनकी संपत्ति को बायपास कर दिया. अब युशोउ का घर व्यस्त हाईवे के बीच में अकेला खड़ा है, जो उन्हें सामान्य परिवेश से काट देता है और लगातार ट्रैफिक, शोर और परेशानी का सामना करना पड़ता है.

सरकार ने परिवार के लिए एक विशेष एक्सेस रूट बनाया था, लेकिन रोजमर्रा की जिंदगी बेहद असुविधाजनक और कष्टदायक हो गई है. सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि युशोउ अब मुआवजे की कोई संभावना खो चुके हैं. हाईवे पूरा हो चुका है, इसलिए अधिकारियों द्वारा फिर से बातचीत या भुगतान की संभावना बहुत कम है. नतीजतन, उन्हें न तो कोई आर्थिक लाभ मिला और न ही व्यावहारिक रहने की सुविधा.

मंडोला गांव भूमि मालिक की मां ने कहा कि हमारी मांग साफ है, हमें वर्तमान भूमि कीमतों के अनुसार मुआवजा चाहिए, वरना वे हमारी जमीन भूल जाएं. सिक्योरिटी गार्ड ने बताया कि घर चारों तरफ से ब्लॉक हो गया है. द इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए सिक्योरिटी गार्ड ने कहा कि घर हमेशा खाली रहता है और मैं रोज इसे साफ करता हूं. उन्होंने आगे कहा कि एक्सप्रेसवे के चालू होने के बाद ट्रैफिक का शोर बहुत मुश्किल से कंट्रोल होता है.

एक्सप्रेसवे के काम की निगरानी करने वाले एक NHAI अधिकारी ने टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया कि एक्सप्रेसवे के ट्रायल ओपन होने से ही उन्हें इस समस्या का पता था. अधिकारी ने कहा कि रैंप को जल्द से जल्द बनाना जरूरी है, लेकिन चूंकि यह मुकदमेबाजी में फंसा हुआ है, इसलिए हम कुछ नहीं कर सकते. हमने क्रैश बैरियर लगा दिए हैं.

मामले की आखिरी सुनवाई मार्च में इलाहाबाद हाईकोर्ट में हुई थी, जिसमें आगे की सुनवाई के लिए नई तारीख दी गई है. चीन का नेल हाउस व्यक्तिगत प्रतिरोध और राज्य द्वारा संचालित इंफ्रास्ट्रक्चर के बीच उच्च दांव वाली टकराव का प्रतीक बन गया. लेकिन यह यह भी दिखाता है कि समझौता न करने पर ऐसी जिद आखिरकार अलगाव और पछतावे में बदल सकती है. स्वाभिमान का क्या होगा, यह देखना अभी बाकी है.

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