नई दिल्ली: भारत की राजधानी में क्वाड देशों की विदेश मंत्रियों की महत्वपूर्ण बैठक ने चीन को बेचैन कर दिया है. बैठक में इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में स्थिरता, समुद्री सुरक्षा और रेयर अर्थ मिनरल्स पर हुई चर्चा के बाद चीन ने तीखी प्रतिक्रिया दी और शांति-स्थिरता की बात करनी शुरू कर दी.
नई दिल्ली में हुई क्वाड (भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया) विदेश मंत्रियों की बैठक में चीन का नाम लिए बिना दक्षिण चीन सागर में खतरनाक सैन्य गतिविधियों और विवादित क्षेत्रों में सैन्यीकरण की कड़ी आलोचना की गई. इस पर चीनी विदेश मंत्रालय ने तुरंत बयान जारी कर क्वाड पर आरोप लगाया कि चार देश मिलकर किसी तीसरे देश को निशाना बना रहे हैं, जो क्षेत्रीय शांति के लिए खतरा है.
चीनी प्रवक्ता माओ निंग ने कहा, ''किसी भी देशों के बीच सहयोग क्षेत्रीय शांति, स्थिरता और समृद्धि को बढ़ावा देना चाहिए. ऐसा कोई समूह किसी तीसरे देश को टारगेट नहीं करना चाहिए. हम गुटबंदी और गुटीय टकराव का विरोध करते हैं.''
क्वाड का साफ संदेश
बैठक में भारत की ओर से विदेश मंत्री एस. जयशंकर, अमेरिका से मार्को रूबियो, जापान से तोशिमित्सु मोतेगी और ऑस्ट्रेलिया से पेनी वोंग शामिल हुए. चारों देशों ने संयुक्त बयान में इंडो-पैसिफिक में मुक्त, खुला और समावेशी क्षेत्र बनाने पर जोर दिया.
विशेषज्ञों का मानना है कि क्वाड की बढ़ती सक्रियता से चीन की दक्षिण चीन सागर में अपनी दादागिरी वाले रवैये को चुनौती मिल रही है. हालांकि, क्वाड देश बार-बार दोहराते रहे हैं कि यह मंच किसी तीसरे देश के खिलाफ नहीं, बल्कि क्षेत्रीय सहयोग और सुरक्षा के लिए है. भारत ने हमेशा स्पष्ट किया है कि क्वाड एक सकारात्मक एजेंडा वाला मंच है, न कि कोई सैन्य गठबंधन. फिर भी चीन इसे शुरू से ही अपने खिलाफ मानता आया है.
यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में भू-राजनीतिक तनाव बढ़ रहा है. क्वाड की इस कार्रवाई को चीन के लिए एक मजबूत संदेश के रूप में देखा जा रहा है. कई अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ मानते हैं कि क्वाड की मजबूती चीन की विस्तारवादी नीतियों के लिए बड़ी बाधा बनती जा रही है, जिसके चलते बीजिंग बार-बार शांति की दुहाई दे रहा है.