नई दिल्ली : नेपाल-चीन सीमा पर बुधवार को आई अचानक बाढ़ ने हिमालयी क्षेत्र में आपदा प्रबंधन और सीमा-पार शुरुआती चेतावनी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. तिब्बत के केरुंग क्षेत्र से आई बाढ़ ने नेपाल के रसुवा जिले के टिमुरे, स्याफ्रुबेसी और रसुवागढ़ी इलाके में भारी तबाही मचाई. भोटेकोशी नदी में अचानक आए उफान ने घरों, बाजारों, सड़कों, पुलों, वाहनों और जलविद्युत परियोजनाओं को नुकसान पहुंचाया.
नेपाल के स्थानीय सूत्रों और प्रकाशित रिपोर्टों के मुताबिक, केरुंग में बाढ़ की जानकारी नेपाल को करीब 45 मिनट की देरी से मिली. इसी देरी के कारण टिमुरे के लोगों को तत्काल सुरक्षित स्थानों तक पहुंचने के लिए पर्याप्त समय नहीं मिल पाया. उपलब्ध स्थानीय रिपोर्टों में इतना जरूर सामने आया है कि टिमुरे में बाढ़ बेहद तेजी से पहुंची और लोगों को प्रतिक्रिया देने के लिए बहुत कम समय मिला.
रिपोर्टों के अनुसार, तिब्बत में सुबह 10:30 बजे दर्ज हुई घटना नेपाल के समय के हिसाब से करीब 8:15 बजे के आसपास की थी. नेपाल के अधिकारियों को करीब 9:15 बजे तिब्बत की ओर से बड़ी बाढ़ आने की सूचना मिलने की बात सामने आई है. यानी शुरुआती चेतावनी और बाढ़ के नेपाल पहुंचने के बीच का समय बेहद महत्वपूर्ण था.
कैसे आई इतनी भयावह बाढ़?
शुरुआती जांच में वैज्ञानिकों ने बर्फ और चट्टानों के बड़े मलबे के नदी में गिरने की आशंका जताई है. क्षेत्र में करीब 4.4 तीव्रता का भूकंप भी दर्ज हुआ था और संभव है कि उससे आइस-रॉक एवलॉन्च शुरू हुआ हो. हालांकि, बाढ़ के सटीक ट्रिगर की अंतिम पुष्टि अभी बाकी है. नेपाल में भोटेकोशी नदी तिब्बत से आती है और आगे त्रिशूली नदी में मिलती है. इसलिए अचानक आने वाली बाढ़ का असर सीमा से काफी नीचे तक पहुंच सकता है. नेपाल प्रशासन ने त्रिशूली और नदी किनारे रहने वाले लोगों को तत्काल सुरक्षित स्थानों पर जाने की चेतावनी दी है.
टिमुरे में तबाही, बड़ी संख्या में लोग लापता
टिमुरे और आसपास के इलाकों में बाजार और बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान हुआ है. नेपाल के अधिकारियों के मुताबिक नौ सशस्त्र पुलिसकर्मियों के लापता होने की भी रिपोर्ट है. कई स्थानों पर सड़क और पुल टूटने से राहत एवं बचाव अभियान मुश्किल हो गया है. नेपाल पर्यटन अधिकारियों ने 384 यात्रियों के लापता होने की सूचना दी, जिनमें 105 भारतीय नागरिक भी शामिल है. आंकड़े लगातार बदल रहे हैं और राहत अभियान जारी है.