नई दिल्ली: विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शुक्रवार को नई दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर नेपाल की बाढ़ से बचाए गए तमिलनाडु के 21 भारतीय तीर्थयात्रियों का स्वागत किया. ये तीर्थयात्री कैलाश मानसरोवर की यात्रा पर गए थे और नेपाली सेना ने उन्हें बचाकर काठमांडू पहुंचाया था. इसके बाद भारतीय दूतावास ने उनकी भारत वापसी का इंतजाम किया.
तीर्थयात्रियों से मिलने के बाद पत्रकारों से बात करते हुए जयशंकर ने कहा, ''मैंने अभी भारतीयों के एक समूह का स्वागत किया है जो कैलाश मानसरोवर की तीर्थयात्रा पर गए थे. उन्हें नेपाली सेना ने बचाया और काठमांडू पहुंचाया. मैं उनसे मिलने, इस बात पर खुशी जाहिर करने कि वे सुरक्षित हैं, और उनके अनुभवों के बारे में जानने के लिए यहां आया था.''
उन्होंने नेपाल सरकार और नेपाली सेना का आभार जताते हुए बताया कि सरकार प्रभावित इलाकों में मौजूद सभी भारतीय नागरिकों से संपर्क करने पर पूरा ध्यान दे रही है. जयशंकर ने कहा, ''हमारा मानना है कि 315 से ज्यादा भारतीयों से अभी तक संपर्क नहीं हो पाया है. अलग-अलग जगहों से लगभग 85 भारतीयों को बचाया गया है, जिनमें अभी आए 21 तीर्थयात्रियों का यह समूह भी शामिल है.''
नेपाल में मदद और बचाव पहली प्राथमिकता
विदेश मंत्री ने स्पष्ट किया कि भारत की सबसे बड़ी प्राथमिकता नेपाल के बचाव और राहत कार्यों में मदद करना तथा प्रभावित इलाकों में फंसे भारतीय नागरिकों को सुरक्षित वापस लाना है. उन्होंने शुक्रवार सुबह नेपाल के विदेश मंत्री से बात की और कई तरह की मदद की पेशकश की, जिस पर काठमांडू विचार कर रहा है.
जयशंकर ने बताया कि भारत एक हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट में मदद के लिए टनलिंग एक्सपर्ट्स की टीम भेजने की तैयारी कर रहा है, जहां लोग टनल के अंदर फंसे होने की आशंका है. बेली ब्रिज भी भेजे जाएंगे, जिन्हें बाढ़ प्रभावित इलाकों में तेजी से लगाया जा सकेगा. जरूरत पड़ने पर मेडिकल टीमें और NDRF के कर्मी भी भेजे जा सकते हैं.
तीसरी राहत उड़ान आज रवाना
भारत पहले ही दो विमानों से राहत सामग्री भेज चुका है. तीसरी राहत उड़ान शुक्रवार को रवाना होने वाली है. जयशंकर ने जोर देकर कहा कि मुख्य बचाव अभियान नेपाल के अधिकारियों और सुरक्षा बलों द्वारा चलाए जा रहे हैं, और भारत जहां जरूरत हो वहां सहायता दे रहा है. उन्होंने कहा, ''अभी हमारे लिए यही सबसे बड़ी प्राथमिकता है—इस स्थिति से कैसे निपटा जाए, नेपाल में राहत कार्यों में कैसे मदद की जाए, और बचाव कार्य तथा हमारे लोगों की वापसी में कैसे सहायता की जाए.''