बेंगलुरु: कर्नाटक के यादगीर जिले में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के पथ संचलन में हिस्सा लेने के आरोप में दो सरकारी स्कूल शिक्षकों को निलंबित कर दिया गया है. शिक्षा विभाग ने दोनों के खिलाफ विभागीय जांच के आदेश दिए हैं. निलंबित किए गए शिक्षक हैं- हुनासागी के सरकारी गर्ल्स हाई स्कूल के गुरुराज जोशी और सुरपुर तालुक के कुप्पी स्थित सरकारी लोअर प्राइमरी स्कूल के हेडमास्टर अन्ना साहेब देशमुख.
ये दोनों पिछले साल अक्टूबर में RSS के पथ संचलन में शामिल हुए थे. आंबेडकर स्वाभिमानी सेना के जिला अध्यक्ष जुमन्ना गुदिमानी की शिकायत पर 20 अगस्त को विभाग ने जांच पूरी होने तक उन्हें सस्पेंड कर दिया. शिक्षा विभाग के अनुसार, शिक्षकों के RSS कार्यक्रम में शामिल होने से कर्नाटक सिविल सेवा (आचरण) नियम 2021 के प्रावधानों का प्रथमदृष्टया उल्लंघन हुआ है.
यादगीर के स्कूल शिक्षा उप-निदेशक चन्नाबसप्पा मुधोल ने बताया कि यह ड्यूटी में लापरवाही और नियमों 3(1), 3(2), 3(3), 5(1) तथा 7 का उल्लंघन है. दोनों शिक्षकों ने स्पष्टीकरण में कहा कि कार्यक्रम रविवार को काम के घंटों के बाद हुआ था और RSS राजनीतिक नहीं बल्कि सांस्कृतिक संगठन है.
विभाग ने इस स्पष्टीकरण को खारिज कर दिया. दोनों को नियम 98 के तहत निर्वाह भत्ता मिलेगा और सक्षम अधिकारी की अनुमति के बिना मुख्यालय नहीं छोड़ सकते. अन्ना साहेब देशमुख के खिलाफ आंबेडकर स्वाभिमानी सेना ने मंत्री प्रियंक खड़गे से भी शिकायत की थी. विभाग के आदेश में कहा गया है कि सरकारी कर्मचारी राजनीतिक दलों या राजनीति से जुड़े संगठनों के सदस्य नहीं हो सकते, उनसे नहीं जुड़ सकते और न ही उनके आंदोलनों में भाग ले सकते हैं.
केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रल्हाद जोशी का हमला
केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने कर्नाटक सरकार पर तीखा हमला बोला है. उन्होंने राज्य सरकार द्वारा आरएसएस के पथ संचलन में हिस्सा लेने वाले दो सरकारी स्कूल शिक्षकों को निलंबित करने की कार्रवाई को ‘नफरत’ और ‘बदले की भावना’ से प्रेरित बताया है तथा इसे तुरंत वापस लेने की मांग की है.
हुबली में पत्रकारों से बात करते हुए जोशी ने कहा कि यादगीर जिले के दो शिक्षकों—गुरुराज जोशी और अन्ना साहेब देशमुख—को आरएसएस के रूट मार्च में शामिल होने के कारण सस्पेंड करना कानूनी रूप से टिकने वाला नहीं है. उन्होंने आरोप लगाया कि डीके शिवकुमार सरकार बदले की भावना से काम कर रही है.