नई दिल्ली : नेपाल के रसुवा जिले में नेपाल-तिब्बत सीमा के पास एक बार फिर बाढ़ का बड़ा खतरा पैदा हो गया है। 26 अगस्त को ग्लेशियर और चट्टानों के टूटने से आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड के बाद पहाड़ी मलबे से बनी एक झील अब ओवरफ्लो होने लगी है. ओवरफ्लो से किनारा टूट गया है. पानी बढ़ने की आशंका को देखते हुए प्रभावित इलाके में चल रहे रेस्क्यू ऑपरेशन को एहतियातन अस्थायी रूप से रोक दिया गया है. हेलीकॉप्टर से चल रहे बचाव अभियान पर भी इसका असर पड़ा है.
सबसे बड़ी चिंता पानी की मात्रा और उसके अचानक नीचे आने को लेकर है. ताजा रिपोर्टों के मुताबिक सीमा के पास बनी नई झील में करीब 20 लाख घन मीटर पानी जमा होने का अनुमान लगाया गया था और झील के ओवरफ्लो होने से किनारा टूट गया और नीचे की ओर बहने वाले जलस्तर में अचानक बढ़ोतरी का खतरा है.
इससे पहले 26 अगस्त की बाढ़ में भोटे कोशी और त्रिशूली नदी तंत्र में पानी बेहद तेजी से बढ़ा था. एक मॉनिटरिंग पॉइंट पर त्रिशूली नदी का जलस्तर करीब 9 मीटर यानी लगभग 30 फीट तक केवल 30 मिनट में बढ़ गया था. बाढ़ ने रसुवा समेत आसपास के इलाकों में भारी तबाही मचाई है. सड़कें, पुल और हाइड्रोपावर परियोजनाएं बुरी तरह प्रभावित हुई हैं.
ताजा अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों में नेपाल में मृतकों की संख्या 469 तक पहुंचने और दोनों देशों में 1,500 से ज्यादा लोगों के लापता होने की जानकारी सामने आई है. फिलहाल स्थानीय लोगों को ऊंचे और सुरक्षित स्थानों पर जाने की चेतावनी दी गई है. प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां झील के जलस्तर और नदी के बहाव पर लगातार नजर रख रही हैं. सबसे बड़ा खतरा यह है कि यदि मलबे से बना प्राकृतिक बांध अचानक टूटता है तो नीचे के इलाकों में दूसरी विनाशकारी बाढ़ आ सकती है.