नई दिल्ली: भारत अपनी सैन्य ताकत को और मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाने जा रहा है. देश जल्द ही अमेरिका से दुनिया की सबसे आधुनिक और घातक एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल सिस्टम ‘जैवलिन’ (Javelin) खरीदने की योजना बना रहा है. भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोरे ने शुक्रवार को इस सौदे की पुष्टि की. उन्होंने कहा कि यह न सिर्फ भारतीय सेना की एंटी-टैंक क्षमता बढ़ाएगा, बल्कि भारत-अमेरिका रक्षा सहयोग और संयुक्त उत्पादन को भी नई ऊंचाई देगा.
4.57 करोड़ डॉलर का सौदा
अमेरिकी विदेश विभाग ने नवंबर 2025 में विदेशी सैन्य बिक्री कार्यक्रम के तहत भारत को जैवलिन मिसाइल प्रणाली और संबंधित उपकरणों की संभावित बिक्री को मंजूरी दे दी थी. इस प्रस्तावित सौदे का अनुमानित मूल्य करीब 4.57 करोड़ डॉलर है. पैकेज में 100 एफजीएम-148 जैवलिन मिसाइल राउंड, एक फ्लाई-टू-बाय मिसाइल और 25 जैवलिन लाइटवेट कमांड लॉन्च यूनिट्स (या ब्लॉक 1) शामिल हैं. शुरुआती खरीद के बाद भविष्य में दोनों देशों में इस सिस्टम के सह-उत्पादन की संभावनाएं भी तलाशी जा सकती हैं, जिससे भारत के स्वदेशी रक्षा निर्माण को बल मिलेगा.
जैवलिन मध्यम दूरी की, कंधे से दागी जाने वाली एंटी-टैंक मिसाइल प्रणाली है. इसे मुख्य रूप से पैदल सेना, स्काउट्स और कॉम्बैट इंजीनियर्स के लिए डिजाइन किया गया है. इसकी सबसे बड़ी खासियत ‘फायर एंड फॉरगेट’ यानी दागो और भूल जाओ तकनीक है. सैनिक लक्ष्य पर लॉक करके मिसाइल दाग देता है, फिर मिसाइल खुद लक्ष्य को ढूंढकर नष्ट कर देती है. इससे सैनिक को तुरंत जगह बदलने का समय मिल जाता है. यह भारी बख्तरबंद टैंकों और बंकरों को नष्ट करने में सक्षम है. जरूरत पड़ने पर इसे सैन्य वाहनों, विमानों या नौकाओं पर भी माउंट किया जा सकता है.
कौन बनाता है और भारत के लिए क्यों अहम?
इस सिस्टम को अमेरिका की दो बड़ी रक्षा कंपनियों आरटीएक्स और लॉकहीड मार्टिन के संयुक्त उद्यम ‘जैवलिन जॉइंट वेंचर’ ने विकसित किया है. अमेरिकी सेना और कई अन्य देश लंबे समय से इसका इस्तेमाल कर रहे हैं. सीमावर्ती इलाकों और दुर्गम पहाड़ियों में पैदल सेना के लिए यह एक तेज और सटीक हथियार साबित होगा. इसके शामिल होने से भारतीय सेना की जमीनी मारक क्षमता में काफी इजाफा होगा और भारत-अमेरिका रक्षा साझेदारी को नया आयाम मिलेगा.