नई दिल्ली: मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में दूषित पेयजल संकट ने गंभीर रूप ले लिया है. भागीरथपुरा इलाके में नर्मदा जल की पाइपलाइन में सीवेज का रिसाव होने से पानी प्रदूषित हो गया, जिसके कारण उल्टी-दस्त की महामारी फैल गई. इस त्रासदी में अब तक कई लोगों की जान जा चुकी है, जबकि सैकड़ों प्रभावित होकर अस्पतालों में भर्ती हैं.
देश के सबसे स्वच्छ शहर के रूप में मशहूर इंदौर की यह घटना प्रशासनिक लापरवाही पर बड़ा सवाल खड़ा कर रही है. मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शुक्रवार को भोपाल में मुख्य सचिव और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय बैठक की. बैठक में नगरीय प्रशासन विभाग की रिपोर्ट पर विस्तार से चर्चा हुई और दोषी अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने के निर्देश दिए गए.
सीएम के सख्त निर्देशों पर इंदौर नगर निगम कमिश्नर दिलीप यादव को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है. साथ ही अपर आयुक्त रोहित सिसोनिया को तत्काल प्रभाव से इंदौर से हटाया गया है. जल वितरण विभाग के प्रभारी अधीक्षण यंत्री संजीव श्रीवास्तव से भी उनका प्रभार वापस ले लिया गया है.
इससे पहले लापरवाही के लिए कुछ जूनियर अधिकारियों को निलंबित और एक को सेवा से बर्खास्त किया जा चुका है. सीएम ने सोशल मीडिया पर जानकारी साझा करते हुए कहा कि इस दुखद घटना के लिए जिम्मेदारों को किसी भी स्तर पर बख्शा नहीं जाएगा. साथ ही नगर निगम में रिक्त पदों को फौरन भरने और राज्य के अन्य क्षेत्रों में भी सुधारात्मक कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं.
प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्र में टैंकरों से पानी की आपूर्ति शुरू की है और घर-घर सर्वे कर मरीजों का इलाज सुनिश्चित किया जा रहा है. जांच रिपोर्ट में पानी में बैक्टीरिया की पुष्टि हुई है, जिससे यह संकट और गहरा गया है. इस घटना ने न केवल स्थानीय लोगों में आक्रोश पैदा किया है, बल्कि पूरे प्रदेश में जल आपूर्ति व्यवस्था पर बहस छेड़ दी है.