क्या योगी के पीछे से एक ताकत ने अपना हाथ खींच लिया है. क्या RSS ने योगी को वो स्थान दिला दिया है जिसकी तलाश वो पिछले सात वर्षों से कर रहे थे. दावा किया जाता था कि योगी सिर्फ एक चेहरा थे असली काम और फैसला बीजेपी में कोई और लेता था. केजरीवाल का दावा था कि बीजेपी योगी को हटा देगी. इसके पीछे कई तर्क भी थे.
दावा ये किया जाता रहा था कि योगी सिर्फ एक मुखौटा हैं. बीजेपी जब चाहेगी तब हटा देगी. ऐसा दावा इसलिए किया जाता रहा है कि क्योंकि योगी की टीम में किसी और की टीम दिखाई देती थी. ऐसा पहली बार हुआ है, जब यूपी के सबसे बड़े अधिकारी को योगी ने खुद चुना हो. योगी का दाहिना हाथ बन गए हैं मनोज कुमार सिंह.
ये मनोज कुमार सिंह कौन है और किस लिए योगी ने इन्हें अपनी टीम में चुना. ये बताएं इसके पहले समझिए एक खेल जिसका अंत RSS ने कर दिया है. अब तक काम योगी करते थे लेकिन टीम किसी और की होती थी. लेकिन चुनाव के बाद योगी और मोहन भागवत की बैठक ने सारा खेल बदल दिया. कहा जाता है कि बीजेपी में योगी के पीछे कई नेता पड़े थे, जिसमें एक नाम केशव प्रसाद मौर्य का था. दूसरा नाम सुनील बंसल का था, तीसरा नाम बृजेश पाठक का था, चौथा नाम स्वतंत्र देव सिंह का साथा, पांचवां नाम मोदी के बेहद ख़ास अधिकारी रहे एक शर्मा का रहा.
ऐसे ही कई नाम थे जो योगी के पीछे खड़े थे, जब योगी काम करने की कोशिश करते तो उनकी चलती नहीं. यही कारण है कि लोकसभा चुनाव में उनकी एक नहीं चली. यहां तक कि एमएलसी चुनाव में भी उनकी नहीं चली. UP के अधिकारी अब तक मनमर्जी काम करते थे क्योंकि जो मेन अधिकारी होता है अगर वो सीएम का आदमी नहीं होगा तो फिर ब्यूरोक्रेसी को संभालना किसी मुश्किल से कम नहीं होता है.
मनोज कुमार सिंह योगी के बेहद खास अधिकारी माने जाते हैं, उनका नाम योगी की फेवरेट लिस्ट में है. अभी तक मुख्य सचिव दुर्गाशंकर मिश्रा थे जो मोदी के ख़ास अधिकारी माने जाते थे. उनके रिटायरमेंट के बाद भी लगातार उन्हें एक्टेंशन दिया जाता रहा. अब उनकी यूपी से विदाई हो गई है. ऐसा कहा जाता है कि दुर्गा शंकर दिल्ली से मिले आदेश को मानते थे. यहां योगी कमज़ोर हो जाते थे. कहा जाता है कि मुख्य सचिव ऐसा पद है जो सीएम का दूसरा चेहरा माना जाता है. कहते हैं कि मनोज कुमार सिंह योगी की उस लॉबी में फिट बैठते हैं, जहां से उनका काम करने का तरीका बेहतर होगा. जैसे योगी फायर रहते हैं वैसी ही मनोज कुमार सिंह ‘डिलीवरी ऑन टाइम' वाले अधिकारी है. इसे ऐसे समझा जा सकता है योगी ने जब इन्हं पंचायती राज का मुख्य सचिव बनाया तो इन्होंने कई बेहतर काम किए थे. कोरोनाकाल में योगी ने जो टीम 11 और टीम 9 बनाई थी उसमें मनोज सिंह का नाम था.
बैंकिंग एट योर डोर का सपना दिखाया और उसे ज़मीन पर उतारने का काम भी कर दिखाया. योगी की बैंक सखी योजना भी मनोज कुमार का आईडिया था. ज़मीन पर भी उतार दिखाया. अब योगी के साथ मिलकर UP को बेलगाम अधिकारियों को रास्ते पर लाकर यूपी को बदलें. योगी के सामने अभी कई चुनौतियां हैं. कुंभ मेले से लेकर 2027 का चुनाव सब उनकी तरफ देख रहा है. ऐसे में आएसएस के दखल के बाद उनकी ताकत बढ़ती जा रही है.
मनोज कुमार सिंह ने कुंभ 2019 में काफी काम किया था. आने वाले साल 2025 में महाकुंभ भी हैं. योगी की टीम में अभी कई और नियुक्ति होनी है. ख़बर यहां तक है कि दिल्ली का प्रभाव अब लखनऊ पर कम हो गया है. योगी के हर तबादले में अब उनकी चल रही है. अब तक यूपी में कुछ ऐसा माहौल था कि अधिकारी किसी फाइल पर साइन करने से पहले सोचते थे कि कहां कि सुनी जाए, किसकी सुनी जाए. हालांकि कुछ लोग दावा कर रहे हैं कि योगी ने अपनी ठाकुर लॉबी वाली छवि का ध्यान नहीं दिया इसलिए अब एक राजपूत को ही मुख्य सचिव बना लिया.