उत्तर प्रदेश में ये क्या हो रहा है, योगी जो कानून ला रहे हैं, जो विधेयक विधानसभा में पेश कर रहे हैं, उसी के खिलाफ उनके विधायक बोलने लगे हैं. न सिर्फ विधायक बल्कि बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष भूपेन्द्र चौधरी तो सीधा ये कहते हैं कि इस विधेयक को प्रवर समिति के पास भेजिए हम इस पर राजी नहीं हैं और आखिर में इसे प्रवर समिति के पास भेज भी दिया जाता है. ऐसे में सवाल ये भी है कि क्या अविश्वास प्रस्ताव वाली स्थिति में अपने ही विधायक योगी के खिलाफ वोट कर देंगे, हम इस सवाल पर आएंगे लेकिन उससे पहले सुनिए 1 अगस्त को जिस दिन योगी विधानसभा में खूब दहाड़े, उस दिन एक विधयेक पर बीजेपी विधायकों ने ही सवाल क्यों उठाए. पूरी कहानी नजूल जमीन से जुड़ी है.
क्या होती है नजूल भूमि
आपने अक्सर देखा होगा, लाल रंग के बोर्ड पर लिखा होता है ये नजूल भूमि है, जिस पर सरकार का हक होता है. ये जमीनें अंग्रेजों के जमाने की है, उस वक्त देश अलग-अलग रियासतों में बंटा था, जो रियासतें अंग्रेजों का विरोध करती थी और ब्रिटिश सेना से हार जाती थी, उनकी जमीनों पर अंग्रेज कब्जा कर लेते थे. साल 1947 के बाद अंग्रेज जब चले गए तो भारत सरकार ने उन राजा-महाराजाओं के खानदान को जमीन के कागजात दिखाने को कहा, जब वो कागजात नहीं दिखा पाए तो सरकार ने इसे अपने कब्जे में ले लिया और नजूल भूमि घोषित कर दिया.
एक शब्द में कहिए तो ऐसी जमीन जिसका दशकों से कोई वारिस नहीं मिला, वो नजूल जमीन है. अब योगी सरकार जो विधेयक लेकर आई है उसके मुताबिक नजूल की जमीन का सरकार अपनी मर्जी से विकास कार्यों में इस्तेमाल कर सकेगी. आप कहेंगे सरकारी जमीन जो बंजर पड़ी है, जहां कुछ नहीं होता, उसका इस्तेमाल अगर विकास कार्यों में हो रहा है तो फिर बीजेपी विधायकों को दिक्कत क्यों है.
तो इसे समझने के लिए अनुप्रिया पटेल का ये ट्वीट देखिए, वो मोदी सरकार में मंत्री हैं, पर योगी के इस बिल को गैर जरूरी बताती हैं. राजा भैया जो पहले दिन योगी का पैर छूते हैं, इस बिल का विरोध करते हैं और ये तक कहते हैं कि हाईकोर्ट भी नजूल की भूमि पर है, उसका क्या करेंगे. अखिलेश यादव की पार्टी के कई विधायक भी इसके खिलाफ खड़े नजर आते हैं, पर बिल जब विकास से जुड़ा है तो विरोध क्यों, ये समझना बेहद जरूरी है.
नजूल भूमि विधेयक का विरोध क्यों
पर सवाल ये है कि क्या यूपी सरकार के पास विकास कार्यों के लिए जमीनें कम पड़ रही हैं, जो इस तरह का कानून लाना पड़ रहा है. पहले ही योगी सरकार पर बुलडोजर से गरीबों को बेघर करने के आरोप विपक्ष लगा रहा है और अब अपने लोग भी खिलाफ खड़े होने लगे हैं. उत्तर प्रदेश के एक बड़े नेता कहते हैं इस बिल का मकसद विकास कार्य नहीं बल्कि गोरखपुर की नजूल भूमि पर सरकार का कब्जा जमाना है, पर समझने वाली बात ये है कि फिलहाल नजूल भूमि को लेकर जो कानून है वो सरकार को ये अधिकार देता है कि आप अपनी मर्जी से जब चाहें उसका पट्टा समाप्त कर सकते हैं और उसे अपने अधिकार में ले सकते हैं, फिर नए कानून की जरूरत क्यों है.
ये योगी सरकार को अपने विधायकों को कम से कम जरूर समझाना होगा. क्योंकि कोई भी नया कानून तभी बनता है जब उसकी जरूरत होती है. किसी बिल पर विरोध होना अच्छी बात है, ताकि कानून बेहतर बन सके लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि योगी के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव आए तो विधायक खिलाफ वोटिंग कर देंगे. क्योंकि बीजेपी में अनुशासन ही सबकुछ है.