लखनऊ: साल 2025 में योगी नाम का तूफान बस कुछ दिनों में ही आने वाला है...फिर बुलडोजर क्रांति कब शुरू होगी ये बताते हैं, ये है UP का CM आवास. यहां योगी रहते हैं. यहां किसी ख़तरे का इनपुट है, इसलिए अचानक योगी के आवास का जो गेट है, उसे और मज़बूत किया जा रहा है. ताकि कोई अनियंत्रित भीड़ सीएम आवास का गेट तोड़कर अंदर घुसने की कोशिश न कर पाए. 5 कालीदास मार्ग, यूपी का CM आवास. अभी जहां योगी रहते हैं. उसके अंदर और बाहर निकलने वाले गेट पर 21 करोड़ रुपये खर्च किया जा रहे हैं. ताकि गेट को और मज़बूत किया जा सके. तो फिर किस बात का डर है? ये समझने के लिए आपको ये जानना होगा कि अचानक साल बदलते ही अकबनगर के बाद अब बांग्लादेशियों की झुग्गियों पर बुलडोज़र क्यों चलेगा? और कोर्ट में अगर कोई याचिका लगाएगा तो क्या होगा?

इस कहानी की शुरूआत होती है. साल 2000 से, UP में कल्याण सिंह की सत्ता चली गई थी...मायावती और मुलायम बारी-बारी से मुख्यमंत्री बने. मुसलमानों के लिए दरवाजे खोल दिए गए. नतीजा UP की राजधानी लखनऊ में ही बंगाल और असम के रहने वाले भारी संख्या में गरीब मुसलमानों ने कब्जा कर लिया. उन्हीं बंगाली और आसामी लोगों के बीच लाखों की संख्या में बाग्लादेशी भी लखनऊ की झुग्गियों में रहने लगे. इस बात की भनक किसी को नहीं लगी. नगर निगम लखनऊ की सत्ता अभी बीजेपी के पास है. और उसी निगम ने एक सर्वे किया है, जिसमें पौने दो लाख बांग्लादेशियों के होने की बात पेपर पर लिखी गई है. पर लखनऊ की मेयर को शक है, ये संख्या पांच से 6 लाख हो सकती है. तो कहानी यहीं से समझते हैं. UP में बांग्लादेशी आए पुरानी सरकारों में, सर्वे नई सरकार यानि योगी सरकार ने करवाया. अब अवैध रूप से बनी झुग्गियां तोड़ी जाएगी, कोर्ट का ही आदेश है सरकारी ज़मीन और रेलवे की ज़मीन को खाली करवाया जाए.

लखनऊ का हाल एकदम उत्तराखण्ड के हल्दवानी की तरह हो गया है. लखनऊ में योगी को क्यों 10 हज़ार झुग्गियों पर बुलडोज़र चलाना चाहिए, इसको ज़रा हल्द्वानी के उदाहरण से समझिए. उत्तराखण्ड हमेशा से हिन्दुओं का इलाका था...देखते ही देखते नेपाल के रास्ते और यूपी की सीमाओं के अलावा न जाने कहां-कहां से मुसलमानों की संख्या बढ़ती चली गई. हल्द्वानी में रेलवे की ज़मीन पर पहले झुग्गी बनी, फिर देखते ही देखते मदरसा बना. फिर मजार बन गए. और मस्जिद का निर्माण हो जाता है. कहते हैं ये सब एक दो साल में नहीं होता है. इसके लिए दशक दो दशक का वक्त लगता है. फिर वहां पर बीजेपी की सरकार, मोदी राज़ में बनी. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बुलडोज़र एक्शन का फैसला किया.

कोर्ट का आदेश आया कि रेलवे की ज़मीन खाली करवाई जाए. हिन्दुस्तान का कानून कहता है कि आप रेलवे का एक लोहा तक उठा लें तो लंबी सज़ा होती है, लेकिन जब कब्जाधारियों को बुलडोजर हटाने पहुंचा तो ऐसी ख़बरें आईं कि वहां बांग्लादेशियों और रोहिंग्याओं ने बवाल काट दिया. पथराव होता है, पेट्रोल बम से हमला होता है. पांच की मौत हो गई. कर्फ्यू लगाना पड़ा. सरकार की बड़ी आलोचना हुई. कोर्ट के आदेश के बाद और बुलडोज़र एक्शन के बाद भी वहां से कब्जाधारियों को पूरी तरह से हटाया नहीं जा सका है. ठीक ऐसा ही लखनऊ में होता है, जब नगर निगम की टीम जाती है तो वहां पर कुछ लोग हमला कर देते हैं, नगर निगम की टीम की गाडी तोड़ देते हैं, महिला कर्मचारी का कपड़ा फाड़ देते हैं.

अब आप अंदाजा लगाइए कि जहां योगी रहते हैं वहां कितना बड़ा ख़तरे का घेरा तैयार कर लिया गया है. इसलिए सरकार किसी योजना पर तैयारी कर रही है, कहा जा रहा है कि झुग्गी बस्तियों पर गरीबों का मकान बनाया जाएगा, उसी नाम पर बुलडोज़र एक्शन तैयार होगा, कोर्ट जाने वाले जाएंगे, रोने वाले रोएंगे, इसलिए योगी सरकार की फाइल आगे बढ़ चुकी है. वहां पर भयंकर तैयारी हो रही है. सर्वे का काम पूरा होते ही बुलडोज़र दौड़ जाएगा. बांग्लादेशी मुसलमानों की संख्या इतनी कैसे हुई, ये भी जांच का विषय है, उस वक्त के अधिकारियों पर भी कार्रवाई होनी चाहिए.

अखिलेश यादव, और मायावती से भी पूछा जाना चाहिए यूपी की ज़मीन पर बांग्लादेशी घुसपैठियों का कब्जा कैसे हो गया? सरकार क्या कर रही थी. दावा किया जा रहा है कि कम से कम 12 से 15 हज़ार झुग्गियां है. यानि कहानी बड़ी है, सरकार के पास कोई रिपोर्ट है, जिसके बाद नगर निगम ने सर्वे शुरू किया है. खुद मेयर वहां का दौरा कर रही हैं. महाकुंभ के बाद जैसे ही योगी फ्री होंगे, अकबरनगर की तरह लखनऊ की झुग्गियों में रहने वाले अवैध बांग्लादेशियों को मिट्टी में मिलाया जा सकता है. उनके पेपर देखे जाएंगे, क्योंकि. योगी के यूपी में कोई नक्शा नहीं बदल सकता है, नक्शा बदलने की ताकत सिर्फ बाबा और बुलडोज़र के पास है.