नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को कहा कि संभल में हुई हिंसा को लेकर न्यायिक आयोग की रिपोर्ट ने खुलासा किया है कि 2024 में दंगे की साजिश कैसे रची गई. तीन सदस्यीय आयोग ने गुरुवार को सीएम से मुलाकात कर 24 नवंबर को शाही जामा मस्जिद के ASI सर्वेक्षण के दौरान भड़की हिंसा पर अपनी रिपोर्ट सौंपी. इस हिंसा में चार लोगों की मौत हुई थी और कई लोग घायल हुए थे. रिपोर्ट में जनसांख्यिकीय बदलाव पर भी जोर दिया गया है.
रिपोर्ट के अनुसार, संभल में हिंदू आबादी स्वतंत्रता के समय 45% थी, जो अब घटकर 15% रह गई है, जबकि मुस्लिम आबादी अब 85% हो गई है. संभल में विभिन्न विकास परियोजनाओं के उद्घाटन और शिलान्यास समारोह में योगी ने कहा कि राज्य अब "तुष्टिकरण" से "संतुष्टिकरण" की ओर बढ़ रहा है और जनसांख्यिकीय बदलाव की कोई गुंजाइश नहीं है. उन्होंने हिंसा को पहले की सरकारों के दौरान हिंदुओं के खिलाफ "लक्षित कार्रवाइयों" से जोड़ा.
योगी ने कहा, "न्यायिक आयोग ने गुरुवार को संभल घटना पर अपनी रिपोर्ट सौंपी, जिसमें 2024 में दंगे की साजिश के कुछ हिस्सों का खुलासा हुआ है. समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के शासन में हिंदुओं को चुन-चुनकर निशाना बनाया गया, उनकी जनसांख्यिकी कम की गई, उन्हें लगातार दबाया गया और दंगों के जरिए क्षेत्रों को हिंदू-मुक्त किया गया. लेकिन आज डबल इंजन सरकार है, जो जनसांख्यिकी बदलने की इजाजत नहीं देगी. जो भी ऐसा करने की कोशिश करेगा, उसे भागना पड़ेगा, क्योंकि अब हर नागरिक को बिना भेदभाव सरकारी योजनाओं का लाभ मिल रहा है."
रिपोर्ट के प्रमुख बिंदु
सूत्रों के अनुसार, न्यायिक आयोग की रिपोर्ट में कहा गया है कि 1947 के बाद से हर दंगे में हिंदुओं को मुख्य निशाना बनाया गया और संभल हिंसा में भी यही साजिश थी. रिपोर्ट में उत्तर प्रदेश पुलिस को "नरसंहार" रोकने का श्रेय दिया गया है और कहा गया है कि दंगाई बाहर से लाए गए थे. साथ ही, तुर्क-पठान तनाव और हरिहर मंदिर (जो कथित तौर पर मस्जिद से पहले था) को लेकर विवाद ने माहौल को और भड़काया.
बाबर की विरासत का जिक्र भी तनाव बढ़ाने का कारण बना. रिपोर्ट में आरोप है कि क्षेत्र को अस्थिर करने के लिए कट्टरपंथी संगठनों, अवैध हथियारों और ड्रग नेटवर्क को सक्रिय किया गया. हालांकि, राज्य सरकार की त्वरित कार्रवाई की सराहना की गई है.
संभल का हिंसक इतिहास
रिपोर्ट के अनुसार, संभल में सांप्रदायिक तनाव का इतिहास पुराना है. 1953 में शिया-सुन्नी झड़प हुई थी. इसके बाद 1956, 1959, 1962 (जब जनसंघ विधायक महेश गुप्ता पर चाकू से हमला हुआ), 1966 और 1976 में बड़े दंगे हुए. 1976 में मस्जिद समिति के विवाद और एक मौलवी की हत्या के बाद मंदिरों पर हमले हुए और कर्फ्यू लगाना पड़ा.
उत्तर प्रदेश की माध्यमिक शिक्षा राज्य मंत्री गुलाब देवी ने इस मुद्दे को उठाते हुए कहा, "जांच से पता चला है कि संभल में हिंदू आबादी स्वतंत्रता के समय 45% थी, जो अब 15% रह गई है. बाकी 30% आबादी कहां गई? क्या वे पलायन कर गए? क्या उन्होंने धर्म परिवर्तन किया? या उनकी हत्या हुई? हाई कोर्ट और हमारी सरकार इस रिपोर्ट के तथ्यों के आधार पर कार्रवाई करेगी."