नामांकन पत्र में त्रुटि की वजह से श्याम रंगीला का पर्चा खारिज कर दिया गया है. नामांकन रद्द होने के बाद उन्होंने कहा कि वाराणसी से नहीं लड़ने देंगे यह तय था, अब साफ हो गया. दिल जरूर टूट गया है, हौंसला नहीं टूटा है. श्याम रंगीला ने ट्विटर पर एक ट्वीट के जरिए नामांकन रद्द होने की जानकारी दी.
श्याम रंगीला ने नामांकन रद्द होने पर कहा कि मुझ जैसे कई लोग पहली बार जो चुनाव लड़ रहे थे, उन्हें नहीं पता होता. ऐसे में यह काम निर्वाचनअधिकारियों का होना चाहिए कि वो हमें बताएं कि कौन-कौन से दस्तावेज लगाने हैं. अधिकारियों ने कुछ नहीं कहा.
सिर्फ चार रसीदें ली, डिपॉजिट रसीद शी और हमें बाहर भेज दिया. बाहर आने के बाद हमें लगा कि हमारा नामांकन हो गया है. जब मैंने अपने वकील को दिखाया तो उन्होंने थोड़ी चिंता जरूर जाहिर की थी लेकिन उसमें समय लिखा हुआ था कि 14 मई को 11 बजे तक संशोधन जमा कर सकते हैं.
हम भागकर रात में आए लेकिन कोई मदद नहीं मिली. सुबह लाइन में लगे. शाम 5 बजे तक बारी आई. रंगीला ने कहा कि अजय राय 13 मई को हमारे सामने 5 मिनट में नामांकन दाखिल करके चले गए थे.
उन्होंने कहा कि हम नेता नहीं थे बल्कि आम आदमी थे और संघर्ष करने के लिए निकले थे. इंदौर, सूरत में जो कुछ हुआ, वह हमें गलत लगा, इसलिए वाराणसी से संदेश देने के लिए हमने चुनाव लड़ने की ठानी थी. हमारा संदेश इतना मजबूत जाएगा, इसका हमें अंदाजा नहीं था.