नई दिल्ली: मध्य प्रदेश के कांग्रेस विधायक फूल सिंह बरैया ने बलात्कार को लेकर दिए गए अपने बयानों से बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है. इस वरिष्ठ नेता ने शनिवार को एक मीडिया इंटरव्यू में दावा किया कि सुंदर महिलाएं अक्सर पुरुषों को विचलित कर देती हैं, जिसके परिणामस्वरूप बलात्कार होता है. उन्होंने इसे यहीं नहीं रोका, बल्कि बलात्कार को जाति और धर्म से भी जोड़ दिया.
विधायक ने कहा, ''अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) समुदायों की महिलाओं के साथ सबसे ज्यादा बलात्कार होता है. बलात्कार का सिद्धांत यह है कि अगर कोई पुरुष सड़क पर चलते हुए किसी सुंदर महिला को देख ले, तो चाहे वह कितना भी समझदार क्यों न हो, उसका ध्यान भटक जाएगा. लेकिन क्या आदिवासी या SC/ST समुदायों में कोई सुंदर महिला होती है?''
उन्होंने आगे कहा, ''तो फिर उनके साथ बलात्कार क्यों होता है? क्योंकि उनके धार्मिक ग्रंथों में लिखा है कि अगर कोई पुरुष इन समुदायों की महिलाओं के साथ संभोग करता है, तो उसे तीर्थयात्रा का फल (तीर्थ फल) मिलता है. इसलिए जो पुरुष तीर्थयात्रा पर नहीं जा सकता, वह क्या करेगा? वह इन समुदायों की किसी महिला के साथ बलात्कार करने की कोशिश करता है.''
बरैया ने यह भी कहा कि कोई पुरुष कभी भी बिना महिला की सहमति के उसके साथ बलात्कार नहीं कर सकता. इन टिप्पणियों पर सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) की ओर से तीखी निंदा हुई और कई नेताओं ने हमला बोला. साम्प्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने के लिए जहर उगलने का आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी से उनकी पार्टी से निलंबन की मांग की.
मोहन यादव ने कहा, ''मैं उनकी (बरैया की) बातों की कड़ी निंदा करता हूं. मैं चाहता हूं कि राहुल गांधी उनसे बात करें और उन्हें निलंबित कर दें.'' अन्य BJP नेताओं, जिनमें संबित पात्रा और केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान शामिल हैं, ने भी इन बयानों की निंदा की. बरैया और राहुल गांधी पर तंज कसते हुए संबित पात्रा ने कहा, ''जब कोई बाबासाहेब का नाम लेकर ऐसी बातें कहता है तो बाबासाहेब की आत्मा को ठेस पहुंचती है. राहुल गांधी से मुझे कोई उम्मीद नहीं है क्योंकि वे कुछ कर ही नहीं पाए हैं, लेकिन उम्मीद है कि प्रियंका वाड्रा अपनी मां से कहेंगी कि बरैया को पार्टी से निकाल दें.''
वहीं चौहान ने कहा कि ये बयान उन्हें बहुत दुखी कर गए हैं. राजनीतिक विरोध के बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अपने बयान पर अडिग रहे. प्रेस के आगे सवालों के जवाब में उन्होंने कहा कि प्रेस को कंगारू कोर्ट लगाने और मौत की सजा सुनाने का कोई अधिकार नहीं है.