नई दिल्ली: कांग्रेस नेता संदीप दीक्षित ने अपने ही पार्टी सहयोगी शशि थरूर पर तीखा हमला बोला और कहा कि तिरुवनंतपुरम के सांसद पार्टी के लिए प्रासंगिक नहीं हैं. यह टिप्पणी तब आई जब थरूर ने आगामी केरल विधानसभा चुनावों के लिए बुलाई गई महत्वपूर्ण बैठक में शामिल न होने की खबर आई.
केरल में महत्वपूर्ण राज्य चुनावों की तैयारियों के बीच थरूर को पार्टी के हाशिए पर धकेलने की प्रक्रिया तेज हो गई है. हमले को और तेज करते हुए दीक्षित ने कहा कि ऐसे नेताओं की अनुपस्थिति से कोई फर्क नहीं पड़ता जो पार्टी के प्रमुख चेहरे नहीं हैं या प्रासंगिक नहीं हैं.
संदीप दीक्षित ने कहा कि केरल के सभी मजबूत और वरिष्ठ नेता बैठक में शामिल हो रहे हैं. जो कांग्रेस के लिए प्रासंगिक हैं, वे आ रहे हैं. अगर ऐसे नेता अनुपस्थित रहें जो पार्टी के प्रमुख चेहरे नहीं हैं या प्रासंगिक नहीं हैं, तो इससे कोई फर्क नहीं पड़ता. थरूर कथित तौर पर राहुल गांधी के कोच्चि दौरे के दौरान उनसे न मिलने से नाराज हैं. वे इस बैठक के बजाय केरल लिटरेचर फेस्टिवल में शामिल होंगे.
थरूर और पार्टी के बीच कथित मतभेद की विवादास्पद खबरें तब और तेज हुईं जब कई घटनाओं ने विशेषज्ञों को उनके असंतोष के बिंदुओं को जोड़ने का मौका दिया. पिछले साल थरूर ने अपने विचार ऑफ द डे में थॉमस ग्रे का उद्धरण पोस्ट किया था- "जहां अज्ञानता सुख है, वहां ज्ञानी होना मूर्खता है."
बाद में एक मलयालम पॉडकास्ट में इंटरव्यू देते हुए उन्होंने चेतावनी दी कि अगर कांग्रेस अपनी अपील का विस्तार नहीं करती, तो केरल में तीसरी बार लगातार विपक्ष में रह जाएगी. उन्होंने यह भी कहा कि केरल कांग्रेस में कई कार्यकर्ता नेतृत्व के शून्यता महसूस कर रहे हैं. तिरुवनंतपुरम से चार बार सांसद चुने जाने का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि अगर पार्टी को अब उनकी सेवाओं की जरूरत नहीं है, तो उनके पास अन्य विकल्प हैं, जैसे किताबें लिखना.
थरूर और कांग्रेस के बीच विवाद पिछले साल संसद के शीतकालीन सत्र से ठीक पहले पार्टी की महत्वपूर्ण बैठक से उनके अनुपस्थित रहने के बाद नए निचले स्तर पर पहुंच गया था. थरूर ने कई बार पार्टी में अपनी भूमिका पर सवाल उठाए हैं.
उन्होंने केरल कांग्रेस में नेतृत्व की कमी की सार्वजनिक आलोचना की और राहुल गांधी से मिलकर पार्टी में अपनी भूमिका को लेकर स्पष्टता मांगी.
कांग्रेस सांसद ने सत्तारूढ़ एनडीए सरकार की नीतियों की तारीफ करके भी विवाद खड़ा किया, चाहे केंद्र स्तर पर हो या केरल में. कोविड वैक्सीन, रूस-यूक्रेन युद्ध और ऑपरेशन सिंदूर पर मोदी सरकार की नीतियों की उनकी बार-बार तारीफ से कांग्रेस ने खुद को उनके विचारों से अलग कर लिया. उन्होंने यहां तक कि डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत-पाकिस्तान युद्धविराम का श्रेय लेने पर मोदी सरकार का बचाव करके पार्टी की लाइन के खिलाफ जाकर बात की.