नई दिल्ली: कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने पार्टी से मतभेद की खबरों के बीच साफ कर दिया है कि उन्होंने संसद में कभी भी कांग्रेस की आधिकारिक लाइन का उल्लंघन नहीं किया. उनका एकमात्र सार्वजनिक असहमति का मुद्दा ऑपरेशन सिंदूर से जुड़ा रहा, जब उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ भारत के मजबूत रुख को लेकर अमेरिका सहित कई देशों में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया था.
केरल लिटरेचर फेस्टिवल में बोलते हुए थरूर ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर पर उन्होंने जो सिद्धांत आधारित रुख अपनाया था, उस पर वे कायम हैं और इसके लिए माफी मांगने का कोई सवाल ही नहीं उठता. उन्होंने जोर देकर कहा, "मैंने संसद में पार्टी के किसी भी स्टैंड का कभी विरोध नहीं किया. एकमात्र ऐसा मामला जहां सैद्धांतिक स्तर पर सार्वजनिक मतभेद हुआ, वह ऑपरेशन सिंदूर था. मैं उस पर कोई पछतावा नहीं करता."
केरल विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी की एक महत्वपूर्ण बैठक में थरूर की अनुपस्थिति को लेकर भी चर्चा हुई थी. संदीप दीक्षित जैसे नेताओं ने उनकी भूमिका पर सवाल उठाए थे. इस पर सफाई देते हुए थरूर ने कहा कि पार्टी के साथ कोई मनमुटाव नहीं है. उन्होंने बताया कि वे पहले ही अपनी अनुपस्थिति की वजह बता चुके थे और ऐसी बातों को मीडिया में उठाने के बजाय सीधे पार्टी नेतृत्व से चर्चा करना बेहतर समझते हैं.
थरूर ने आगे कहा कि वे जो भी कहना चाहते हैं, वह पार्टी के अंदर ही कहेंगे. उन्होंने याद दिलाया कि पहलगाम आतंकी हमले के बाद उन्होंने एक कॉलम में लिखा था कि भारत को विकास पर फोकस रखते हुए पाकिस्तान के साथ लंबे टकराव से बचना चाहिए. किसी भी जवाबी कार्रवाई को सिर्फ आतंकी ठिकानों तक सीमित रखना चाहिए.
संक्षेप में, थरूर ने स्पष्ट किया कि पार्टी लाइन से उनका कोई टकराव नहीं है, सिवाय ऑपरेशन सिंदूर जैसे राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े सिद्धांत वाले मुद्दे के, जहां वे अपने विचार पर अडिग हैं.