नई दिल्ली: मुंबई की एक मजिस्ट्रेट अदालत ने गुरुवार को महाराष्ट्र के बंदरगाह विकास मंत्री नितेश राणे के खिलाफ गैर-जमानती वारंट (एनबीडब्ल्यू) जारी किया. राणे के वकील ने उनकी अनुपस्थिति के लिए छूट की अर्जी दी थी, लेकिन अदालत ने इसे खारिज कर दिया क्योंकि राणे बार-बार सुनवाई में शामिल नहीं हो रहे थे.
पिछले महीने अदालत ने राणे के खिलाफ जमानती वारंट जारी किया था क्योंकि वह सुनवाई में नहीं आए थे. 2 जून को राणे ने स्थायी छूट की अर्जी दी थी, जिसे भी अदालत ने ठुकरा दिया. इससे पहले भी इस मामले में उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी हुआ था, लेकिन बॉम्बे हाई कोर्ट ने उसकी अमलदारी पर रोक लगा दी थी. अदालत ने अब पुलिस को इस नए गैर-जमानती वारंट को लागू करने की स्थिति पर 18 जुलाई तक रिपोर्ट जमा करने का निर्देश दिया है.
यह मामला 2023 में राणे के एक भाषण से शुरू हुआ, जिसमें उन्होंने शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत को "सांप" कहा था और दावा किया था कि राउत उद्धव ठाकरे को छोड़कर 10 जून 2023, एनसीपी के 25वें स्थापना दिवस तक राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) में शामिल हो जाएंगे. शिवसेना (यूबीटी) और एनसीपी ने उस समय राणे के दावों को खारिज कर दिया था.
राउत ने राणे के इस बयान के खिलाफ मुंबई की मजिस्ट्रेट अदालत में मानहानि का मुकदमा दायर किया. अदालत ने राणे को जवाब देने के लिए बुलाया, लेकिन वह बार-बार सुनवाई में शामिल नहीं हुए.
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