नई दिल्ली: 8 जून 2025 को अहमदाबाद में एक रोमांचक और तनावपूर्ण घटना सामने आई, जब एक वांछित अपराधी, अभिषेक उर्फ 'शूटर', ने पुलिस से बचने के लिए पांचवीं मंजिल की कगार पर चढ़कर कूदने की धमकी दी. अभिषेक ने न केवल इस घटना को सोशल मीडिया पर लाइवस्ट्रीम किया, बल्कि पुलिस से पीछे हटने की मांग भी की. इस नाटकीय घटना ने स्थानीय लोगों का ध्यान खींचा और इलाके में हलचल मचा दी. तीन घंटे की लंबी बातचीत और बचाव प्रयासों के बाद, फायर ब्रिगेड ने अभिषेक को सुरक्षित रूप से बचा लिया और पुलिस ने उसे हिरासत में ले लिया.
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अहमदाबाद क्राइम ब्रांच को सूचना मिली थी कि अभिषेक, जिसे 'शूटर संजयभाई सिंह तोमर' के नाम से भी जाना जाता है, शिवम आवास के फ्लैट नंबर 505, X विंग में मौजूद है. अभिषेक कई अपराधों में वांछित था और लंबे समय से पुलिस से फरार था. जब क्राइम ब्रांच की टीम उसके घर पहुंची और दरवाजा खटखटाया, तो उसने दरवाजा खोलने से इनकार कर दिया. दरवाजा अंदर से बंद था, और अभिषेक ने रसोई की खिड़की के रास्ते भागने की कोशिश की. वह पाँचवीं मंजिल की एक संकरी कगार पर चढ़ गया और वहाँ से कूदने की धमकी देने लगा.
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अभिषेक ने इस पूरे घटनाक्रम को अपने मोबाइल फोन से सोशल मीडिया पर लाइवस्ट्रीम किया. उसने पुलिस को चेतावनी दी कि वह उनके सामने आत्मसमर्पण नहीं करेगा. एक क्राइम ब्रांच अधिकारी द्वारा रिकॉर्ड किए गए वीडियो में अभिषेक कहता हुआ सुना गया, "मुझे पता है कि तुम मेरे साथ कैसा व्यवहार करोगे. यह बहुत बुरा होगा. मेरे लिए आत्मसमर्पण करने से बेहतर है कि मैं मर जाऊं." पुलिस ने उसे बार-बार आश्वासन दिया कि उसके साथ उचित और सम्मानजनक व्यवहार किया जाएगा, लेकिन वह अपनी जिद पर अड़ा रहा. इस दौरान, नीचे सड़क पर लोगों की भीड़ जमा हो गई, जो इस नाटकीय दृश्य को देख रही थी.
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जैसे ही स्थिति तनावपूर्ण हुई, क्राइम ब्रांच ने तुरंत फायर ब्रिगेड और आपातकालीन सेवाओं को बुलाया. तीन घंटे की लंबी और सावधानीपूर्वक बातचीत के बाद, फायर ब्रिगेड ने अभिषेक को सुरक्षित रूप से कगार से उतारा और उसे पुलिस को सौंप दिया. पुलिस ने उसे तुरंत हिरासत में ले लिया. क्राइम ब्रांच के डिप्टी कमिश्नर अजित राजीयन ने बताया, "अभिषेक उर्फ शूटर संजयभाई सिंह तोमर अहमदाबाद के पूर्वी जिलों के कई पुलिस स्टेशनों में दर्ज अपराधों में वांछित था. वह लंबे समय से फरार था. क्राइम ब्रांच की कई टीमें उसका पीछा कर रही थीं. आज मिली सूचना के आधार पर हमने कार्रवाई की."
पुलिस के अनुसार, अभिषेक कई आपराधिक मामलों में शामिल रहा है. अहमदाबाद के पूर्वी जिलों में उसके खिलाफ कई FIR दर्ज हैं. वह एक कुख्यात अपराधी के रूप में जाना जाता है, जिसने पुलिस को लंबे समय तक चकमा दिया था. उसकी गिरफ्तारी के बाद, पुलिस अब उसके आपराधिक नेटवर्क और अन्य संदिग्धों की जांच कर रही है. यह भी पता लगाया जा रहा है कि क्या वह किसी बड़े गिरोह का हिस्सा था या अकेले अपराध करता था.
यह घटना पुलिस और अपराधियों के बीच टकराव का एक जीवंत उदाहरण है. अभिषेक का सोशल मीडिया पर लाइवस्ट्रीम करना यह दर्शाता है कि अपराधी अब तकनीक का इस्तेमाल कर जनता का ध्यान खींचने और पुलिस पर दबाव बनाने की कोशिश करते हैं. यह घटना यह भी दिखाती है कि पुलिस और आपातकालीन सेवाएं कितनी तेजी और समन्वय के साथ ऐसी परिस्थितियों को संभाल सकती हैं. अभिषेक की गिरफ्तारी से स्थानीय लोगों में राहत की सांस है, क्योंकि वह इलाके में लंबे समय से खतरा बना हुआ था.
पुलिस ने इस मामले में गहन जांच शुरू कर दी है. अभिषेक के आपराधिक इतिहास, उसके सहयोगियों और अन्य संदिग्ध गतिविधियों की जांच की जा रही है. इस घटना ने पुलिस की त्वरित कार्रवाई और फायर ब्रिगेड की कुशलता को सामने लाया, लेकिन यह भी सवाल उठाता है कि अपराधी इतने समय तक पुलिस से कैसे बचते रहे. यह मामला समाज में अपराध और पुलिस की जवाबदेही पर बहस को और तेज कर सकता है.