जाति प्रमाण-पत्रों का तेज निपटारा: रायपुर में प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा की अध्यक्षता में हुई उच्च स्तरीय समिति की अहम बैठक

Amanat Ansari 01 Jun 2026 11:26: PM 1 Mins
जाति प्रमाण-पत्रों का तेज निपटारा: रायपुर में प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा की अध्यक्षता में हुई उच्च स्तरीय समिति की अहम बैठक

रायपुर: आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय प्रमाणीकरण छानबीन समिति की बैठक आयोजित की गई. बैठक नवा रायपुर स्थित आदिम जाति अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान के सभाकक्ष में हुई. बैठक में कुल 19 प्रकरणों पर चर्चा की गई, जिनमें 7 प्रकरण सुनवाई के लिए और 12 प्रकरण विचार के लिए रखे गए थे.

सुनवाई वाले 7 मामलों में से 4 पर सुनवाई पूरी कर आदेश जारी करने के निर्देश दिए गए. दो प्रकरणों में संबंधित पक्षों को पुनः सुनवाई का अवसर देने का फैसला लिया गया, जबकि एक प्रकरण में सोशल स्टेटस की जांच के लिए विजिलेंस टीम को निर्देशित किया गया. विचाराधीन 12 प्रकरणों में से 2 पर गुण-दोष के आधार पर और 5 पर सकारात्मक विजिलेंस रिपोर्ट के आधार पर आदेश जारी करने के निर्देश दिए गए.

राष्ट्रीय जनजाति आयोग से प्राप्त एक प्रकरण (55 बैगा) की गहन जांच के लिए गौरेला-पैण्ड्रा-मरवाही और मस्तुरी जिले के अधिकारियों के साथ समिति की विजिलेंस टीम द्वारा संयुक्त रूप से क्षेत्र भ्रमण कर वंशावली, अभिलेख और सोशल स्टेटस की जांच करने के निर्देश दिए गए. शेष 4 प्रकरणों में सुनवाई का अवसर प्रदान करने का निर्णय लिया गया.

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से भी हुई सुनवाई

इस बैठक की खास बात यह रही कि 12 विचाराधीन प्रकरणों में से दो में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पक्षकारों की सुनवाई की गई. विभाग का यह प्रयास न्याय प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी एवं सुगम बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है. बैठक में आयुक्त डी. राहुल वेंकट, संचालक हिना अनिमेष नेताम, संचालक ऋतुराज रघुवंशी, विनीत नंदनवार, गायत्री नेताम, रमा उइके, एमानुअल लकड़ा, जितेंद्र गुप्ता, अंजनी भगत समेत कई अधिकारी उपस्थित रहे.

उच्च स्तरीय प्रमाणीकरण छानबीन समिति नियमित बैठकें आयोजित कर जाति प्रमाण-पत्र और सामाजिक स्थिति से जुड़े लंबित प्रकरणों का निपटारा कर रही है. समिति माननीय सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों के साथ-साथ छत्तीसगढ़ अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग (सामाजिक स्थिति के प्रमाणीकरण का विनियमन) अधिनियम 2013 के प्रावधानों के अनुसार 7 सदस्यीय अर्द्ध-न्यायिक स्वरूप में कार्य करती है. आज की बैठक में बड़ी संख्या में पक्षकार और अधिवक्ता भी उपस्थित थे.

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